Essay in Hindi

Essay on Air Pollution in Hindi

वायु प्रदूषण पर निबंध – Essay on Air Pollution (vayu pradushan) in Hindi

प्रस्तावना – मनुष्य बिना भोजन पानी के कुछ दिन तक जीवित रह सकता है पर बिना हवा के कुछ ही मिनट भी जीवित रहना नामुमकिन है। वायु प्रदूषण केवल मनुष्यों को ही नहीं बल्कि वनस्पतियों, जीव-जंतुओं, जलवायु, मौसम, ऐतिहासिक इमारतों और यहां तक कि ओजोन परत को भी नुकसान पहुंचाता है।वायु प्रदूषण को कम करना हर नागरिक का फर्ज है।

वायु प्रदूषण का अर्थ– वायु प्रदूषण का अर्थ होता है कि जब मानवीय एवं प्राकृतिक कारणों से वायु दूषित हो और वायुमंडल प्रदूषण युक्त हो जाता है तो उसे वायु प्रदूषण कहते हैं।अर्थात जब बाहरी स्रोतों से वायुमंडल में अनेक प्रदूषक तत्व जैसे धुआं, धूल, गैस, दुर्गंध आदि बड़ी मात्रा में लंबे समय तक उपस्थित रहे तो हमारे वातावरण को दूषित करती है जिससे प्रत्येक मानव, पशु– पक्षी, वस्तु, पेड़- पौधे आदि को उनके जीवन शैली में समस्या का सामना करना पड़ता है। वायु को प्रदूषित करने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाईऑक्साइड, सल्फर नाइट्रेट एवं नाइट्रोजन ऑक्साइड इत्यादि गैसें हैं। अगर यह गैसेंश्वासनली में प्रवेश कर जाए तो हमारी मौत भी हो सकती है।

वायु प्रदूषण के स्रोत एवं कारण– वायु प्रदूषण के स्रोत एवं कारण निम्नलिखित हैं–1. प्राकृतिक स्रोत- प्रकृति में प्रदूषण ज्वालामुखी से निकली राख, आंधी, तूफान के समय उड़ती धूल, वनों में लगी आग तथा कोहरे इत्यादि के रूप में होता है।
2. मानवीय स्रोत- वर्तमान में वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण मानव की विभिन्न गतिविधियों द्वारा वायु में छोड़ी गई गैस तथा अन्य हानिकारक पदार्थ हैं।
3. पेड़- पौधे की कटाई से वायु प्रदूषण बढ़ा रहा है। पेड़- पौधे हानिकारक प्रदूषणफैलानेवाली गैस कार्बन डाइऑक्साइड को अपने भोजन के लिए ग्रहण करते हैं और जीवनदायिनी गैस ऑक्सीजन प्रदान करते हैं लेकिन मानवोंने आवासीय एवं कृषि सुविधा हेतु इन की अंधाधुंध कटाई की है और हरे पेड़ पौधे की कमी होने से वातावरण को शुद्ध करने वाली क्रिया जो प्रकृति चलाती है वह कम हो गई है।
4. उद्योग धंधे और कल कारखानों के कारण दिन प्रतिदिन हमारा वायुमंडल प्रदूषित हो रहा है क्योंकि इन कारखानों से धुँए के साथ-साथ हानिकारक गैसें भी निकलती है जो पूरे वातावरण को प्रदूषित करती हैं। साथ ही भोपाल में यूनियन कार व्हाइट नामक कंपनी के कारखाने से मिथाइलआइसोसायनाइड नामक जहरीली गैस का रिसाव हुआ जिससे लगभग 15000 से अधिक लोगों की जान गई तथा बहुत से लोग शारीरिक अपंगता से लेकर अंधेपन के भी शिकार हुए।
5. वर्तमान समय में कृषि की प्रक्रिया से भी वायु प्रदूषण होता है। कृषि में अच्छी फसलों के लिए विभिन्न प्रकार के कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करते हैं तो कीटनाशक दवा हवा में मिल जाने के कारण वायु प्रदूषित हो जाती है।
6. वायु प्रदूषण का मुख्य कारण जनसंख्या वृद्धि है। बढ़ती हुई जनसंख्या की जरूरतें पूरी करने के लिए अनेक संसाधनों की भी जरूरत पड़ती है जिनके कारण वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। घरेलू कार्य जैसे भोजन बनाने, पानी गर्म करने इत्यादि में ईंधन जैसे लकड़ी, कोयला, गोबर के कंडे, मिट्टी का तेल, गैस आदि का प्रयोग होता है। इसे जलाने की क्रिया में कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि गैस उत्पन्न होती है जो वायु प्रदूषित करती है।
7. यातायात के साधनों की वृद्धि से इंजनों, बसों, वायुयान व स्कूटर आदि की संख्या बहुत बड़ी है। इन वाहनों से निकलने वाले धुँए वायुमंडल में मिलकर वायु प्रदूषण को बढ़ाते हैं।

वायु प्रदूषण के प्रभाव– वायु प्रदूषण के कारण मनुष्यों में अस्थमा, हृदय रोग, जुकाम- खांसी, आंखों में जलन आदि जैसी समस्या पैदा हो जाती है।

वायु प्रदूषण के कारण सूर्य के प्रकाश की मात्रा में कमी आती है जिससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण की क्रिया प्रभावित होती है।
भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है। प्राचीन स्मारकों पर दुष्प्रभाव पड़ता है इसका उदाहरण ताजमहल को मथुरा तेल शोधक कारखाने से हुआ नुकसान है

वायु प्रदूषण पर नियंत्रण
1. उद्योगों से निकलने वाला दूषित पदार्थ और धुँए का सही तरीके से निस्तारण करना चाहिए।
2. वायु प्रदूषण से बचने के लिए अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाना चाहिए।
3. पेड़ों की अंधाधुंधकटाई पर रोक लगानी चाहिए।
4. ऊर्जा के स्वच्छ संसाधनों का उपयोग करें जैसे सौर ऊर्जा, वायु ऊर्जा और जल ऊर्जा।
5. रेल यातायात में कोयले अथवा डीजल के इंजनों के स्थान पर बिजली के इंजनों का उपयोग किया जाना चाहिए।
देश में प्रदूषण को कम करना प्रत्येक नागरिक का उत्तरदायित्व है। पेड़- पौधे लगाना जल को साफ रखना और वायु में गंदे रासायनिक धुँए को रोकना ही मानव का लक्ष्य होना चाहिए।

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