Essay in Hindi

Essay on Cleanliness in Hindi

स्वच्छता पर निबंध – Essay on Cleanliness in Hindi

स्वच्छता जीवन का एक अति महत्वपूर्ण अंग है। स्वच्छता का वास्तविक अर्थ कीटाणु गंदगी कचरा और आपशिष्ट पदार्थों से मुक्ति एवं उसे बनाए रखने से है। यदि हम जीवन में स्वस्थ्य रहना चाहते हैं तो स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना अतिआवश्यक है। यह हमारी दिनचर्या का ही अंग होनी चाहिए। हाल ही में कोरोना महामारी ने सम्पूर्ण मानव जाती को प्रभावित किया है जिसका मुख्य कारण स्वच्छता का न होना ही है। कोई भी बीमाई तभी पैदा हो सकती है जब आपके आस – पास गंदगी मौजूद हो। चाहे वह किसी भी प्रकार की क्यू न हो। महात्मा गांधी का एक नारा था, कि ‘स्वच्छता ही सेवा है’। उन्होने अपने जीवन में स्वच्छता को सर्वोपरि रखा है।
आज यदि देखा जाए तो प्रदूषण अपनी चरम सीमा पर पहुंचता हुआ दिखाई दे रहा है। जिसके कई घातक दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। जिनमें जलवायु परिवर्तन एक बड़ी परेशानी के रूप में सामने आती दिखाई दे रही है। इसके अलावा नदियों में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। जिससे सिचाई तथा पीने योग्य पानी में भी विषैले तत्व घुल कर हमारे शरीर में प्रवेश कर बीमारियों को जन्म देते हैं। इसलिए स्वच्छता को अपने जीवन में लाने और बनाए रखने अतियावश्यकता है साथ बच्चों को कम उम्र से ही स्वच्छता के लिए जागरूक करना आवश्यक है।
स्वच्छता अभियान और उसके उद्देश्य – स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा स्वच्छता की ओर उठाया गया एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है। जिसका मुख्य उद्देश्य खुले में शौच की समस्या का निदान करना है। इसके अंतर्गत सम्पूर्ण देश में 11 करोड़ निशुल्क शौचालयों का निर्माण कराया जाना है। इसके साथ – साथ सड़कों और फुटपातों की सफाई अधिकृत क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाना मैला धोने की प्रथा का उन्मूलन तथा स्वच्छताओं से जुड़ी प्रथाओं के बारे में लोगों को जागरूक करना है।
स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014, को की गई थी। इस अभियान का उदेश्य 2019 तक सम्पूर्ण भारत को स्वच्छ बनाना था। हमने अक्सर देखा है कि कई लोगों के घरों में शौचालय होने के बावजूद भी बाहर खुले में शौच करते हैं क्योंकि उन्होंने अपनी प्रव्रत्ति ऐसी बना ली है। इस अभियान के तहत उन्हें जागरूक करने का कार्य भी किया जा रहा है। इसके प्रभाव से आज भारत में कई लोगों का खुले में शौच करना बंद हुआ है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा पिछले 5 साल से म.प्र. का इंदौर शहर पूरे देश में सबसे स्वच्छ बना हुआ है।
किन्तु आज भी कई लोग ऐसे हैं जो इसका ख्याल किए बिना कि स्वच्छता न रखने से वे सिर्फ़्स्वयम का ही नहीं बल्कि अपने परिवार और बच्चों का भविष्य भी खराब करते जा रहे हैं। इसके दुष्प्रभाव आगे चलकर कितने घटक हो सकते हैं यह हम सोच भी नहीं सकते कोरोना इसका ही एक जीता जागता उदाहरण है। सिर्फ सरकार द्वारा अभियान चलाने से स्वच्छता नहीं हो सकती। जब तक हमारे विचारों में शुद्धि सुर स्वच्छता नहीं आएगी तब तक हम इस समस्या से नहीं लड़ सकते हैं। इसलिए शारीरिक स्वच्छता के साथ साथ मनशिक और वैचारिक स्वच्छता भी अतिआवश्यक है।

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