Essay on Climate Change in Hindi

जलवायु परिवर्तन पर निबंध – Essay on Climate Change in Hindi

किसी भी स्थामन की दीर्घकालिक मौसम को जलवायु कहते है पृथ्वीर पर होने वाले बदलावों को जलवायु परिवर्तन कहते है। लेकिन जलवायु परिवर्तन केवल तभी घटित होता है जब ये बदलाव पिछले कुछ दशकों से लेकर सदियों तक कायम रहें। यह विभिन्न बाह एवं आं‍तरिक कारणों से होता है ये विस्फोसट पृथ्वीक के वायुमंडल को ठंडा करते रहते है क्यों कि इनसे निकलने वाली यह गैस पृथ्वी की आधार शिला को खंडित करती है जो कि मानव जीवन के लिए बहुत ही खराब है। पृथ्वी को जिस दर पर सूर्य से ऊर्जा मिलतीहैएंवजिसदरसे ऊर्जा वापिस जलवायु में उत्सेर्जित होती है वह पृथ्वीह पर जलवायु संतुलन एवं तापमान को निर्धारित करती है। सौर ऊर्जा के उत्पासदन में किसी भी प्रकार का परिवर्तन इस प्रकार वैश्विुक जलवायु को प्रभावित करता है। जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वीद के पर्यावरण पर नकारात्मपक प्रभाव पड रहा है। ये प्रभाव निम्नकलिखित है-

वन पर्यावरण में कार्बन डाइ ऑक्सा इड का संतुलन बनाए रखने में एक महत्वैपूर्ण भूमिका निभाते है, क्‍योकि वे कार्बन डाई ऑक्साकइड को अवशोषित कर लेते है। हालांकि पेडों की कई प्रजातियां तो वातावरण के लगातार बदलते माहौल का सामना करने में असमर्थ होने की वजह से विलुप्ता हो गए है। वृक्षों और पौधों के बडे पैमाने पर विलुप्तौ हो गए है वृक्षों और पौधों के बडे पैमाने पर विलुप्ति होने के कारण जैव विविधता के स्तैर में कमी आई है जो पर्यावरण के लिए बुरा संकेत है। हमारे सौर मंडल के जो ग्रह है उन पर भी इस बदलते जलवायु परिस्थिेतियों का बुरा प्रभाव दिन प्रतिदिन बढता ही चला जा रहा है। यदि ये परिवर्तन इसी तरह से जारी रहे तो यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में ध्रुवीय क्षेत्रों में जीवन पूरी तरह से विलुप्तस हो सकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण जल परिवर्तन में भी काफी प्रभाव पड रहा है जलवायु परिवर्तन से दुनिया भर के जल प्रणालियों के लिए एक गंभीर संकट ने जन्मे ले लिया है बदलते मौसम की स्थि ति के कारण वर्षा के स्वेरूप में पूरे विश्वे में परिवर्तन हो रहा है और इस वजह से धरती के विभिन्नै भागों में बाढ या सूखे की परिस्थिरतियों निर्मित हो रही है। तापमान में वृद्वि के कारण हिमनदों का पिघलना एक महत्वापूर्ण मुद्दा है।

जलवायु परिवर्तन एक वैश्विनक चुनौ‍ती है, जिससे उबरने के लिए समग्र सं‍तुलित एवं सम्मिेलित प्रयासों की आवश्युमता है। धरती को बचाने के लिए वैश्वि‍क पहल की आवश्येकता है। सभी देशों को साथ मिलकर चलना होगा फिर चाहे वे विकसित देश हों या विकासशील। यदि इस समस्याी के समाधान हेतु वैश्विभक समुदाय पर्यावरण संरक्षण के भारतीय दर्शन से प्रेरणा ले तो सकारात्मदक परिणाम सामने आने चाहिए। मनुष्यक को जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए हर नियत्रिंत प्रयास करें ताकि मनुष्य हर प्रकार की समास्या ओं से दूर रहें मनुष्यव प्राकृतिक कारणों से होने वाले परिवर्तन को तो नहीं रोक सकता। लेकिन वह कम से कम यह तो सुनिश्चि त जरूर कर सकता है कि वह वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली अपनी गतिविधियों को नियंत्रण में रख सके।

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