Essay on Discipline in Hindi

अनुशासन पर निबंध – Essay on Discipline (Anushasan) in Hindi

अनुशासन का महत्व – अनुशासन का अर्थ है, शाशन या नियम से चलना। वस्तुतः प्रक्रति मेन सब कुछ नियम से होता है। सूरज और चंद नियम से उगते और अस्त होते हैं। पेड़ – पौधों में पत्ते भी समय पर झाड़ते और आते हैं, हवा समय से चलती है और ऋतुएँ समय से आती जाती हैं। जब ऐसा नहीं होत है तो, प्रक्रति का संतुलन बिगड़ने से तबाही मच जाती है। जिस प्रकार प्रक्रति में अनुशासन है उसी प्रकार मानव जीवन में भी अनुशासन का महत्वपूर्ण स्थान है। मानव जीवन अनुशासन के बिना व्यर्थ है। जो व्यक्ति अपने जीवन में अनुसाशित नहीं होते उन्हें सारा जीवन समस्याओं में गुज़ारना पड़ता है। अनुशासन के बिना हम कोई भी कार्य सफलता पूर्वक नहीं कर सकते। यदि हमें कोई कार्य सफलता पूर्वक करना है तो हमें अनुशासन में रहने की आवश्यकता है। यदि हम कोई कार्य करना चाहते हैं या करने के बारे में सोच रहे हैं तो हमें सबसे पहले अनुसाशित होना जरूरी है, तभी हम उस कार्य को करने के बारे सोच सकते हैं। यदि हम अनुसाशित नहीं हैं, तो समाज में कोई भी हमारा सम्मान नहीं करता है। समाज में उन्हीं का सम्मान होता है, जो अनुसाशित होकर रहते है। आज समाज में केवल अनुसाशित लोगों की ही आवश्यकता है। बिना अनुशासन के व्यक्ति पशुओं के समान है।

दैनिक जीवन में अनुशासन – हमें दैनिक जीवन में भी अनुशासन रखने की आवश्यकता है। अनुशासन के बिना हमारा दैनिक जीवन भी सही ढंग से नहीं चल सकता। यदि हम जीवन मे शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो हमें अनुशासन का पालन अवश्य ही करना होगा। प्रातः जल्दी उठना, स्नान करना, पूजा पाठ करना, माता – पिता की आज्ञा का पालन करना, अपने से बड़ों का आदर – सम्मान करना, बड़ों की आज्ञा का पालन करना आदि अनुशासन हमारे दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण है।

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन – विद्यार्थी जीवन में अनुशासन बहुत जरूरी है। वे ही समाज के भावी निर्माता हैं। ये ही अगर अनुशासन ने नहीं होंगे तो अन्य लोग कैसे अनुशासन में रहेंगे। विद्यार्थी जीवन में हमें अनुसाशित होकर रहना चाहिए। यही अनुशासन एक विद्यार्थी को अपने जीवन में सफल होने में सहायता करता है।

आज भारत के प्रत्येक क्षेत्र में अनुशासन हीनता द्रष्टिगोचर हो रही है। अधिकारी अपना काम ठीक से नहीं करते जनसेवा पर कम और मेवा पर अधिक ध्यान देते हैं। विद्यार्थी की रुचि पढ़ाई की ओर नहीं है कभी इस विश्वविद्यालय में तो कभी उस विस्वविद्यालय में, कभी इस परीक्षा केंद्र में कभी उस परीक्षा केंद्र में, कभी एक विद्यालय या महाविद्यालय में अभी दूसरे विद्यालय या महाविद्यालय में हड़ताल मार पीट, परीक्षाओं में नकल, नए विद्यार्थियों का उत्पीड़न आदि समाचार प्रतिदिन का विषय बने हुये हैं। केवल विद्यार्थी ही नहीं, समाज के अन्य अंग भी अनुशासन हीनता के केंद्र बन गए हैं। अतः विद्यार्थियों में अनुशासन हीनता दूर करने के लिए जरूरत है, माँ – बाप उनके समक्ष आदर्श प्रस्तुत करें राजनेता उन्हें अपना हथियार न बनाएं और सिक्षक पूरी निष्ठा से उन्हें शिक्षा दें। विद्यार्थी जीवन में मनुष्य हीरा होता है। इसे यदि अनुशासन के साँचे में धधला या तराशा जाएगा तो यह और भी चमक उठेगा अनुशासन से संयम आता है। संयम से आत्मनिष्ठा पनपती है, जो उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। अनुस्सषित विद्यार्थी ही देश को भ्रष्टाचार और गरीबी की दलदल से निकाल सकते हैं।

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