Essay on Environment Protection in Hindi

पर्यावरण संरक्षण पर निबंध – Essay on Environment Protection in Hindi

हमारे चारों ओर ईश्वर द्वारा बनाई गई सुंदर प्रकृति है। पर्यावरण की गोद में सुंदर फूल, हरे भरे वृक्ष,चहचहाते पक्षी, निर्मल नदियां, झरने आदि है जोआकर्षण का केंद्र बिंदु है। परंतु आज मनुष्य ने अपनी अभिलाषा और प्रगति के लिए पर्यावरण के कार्यों में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है। इसके फलस्वरूप पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। पर्यावरणने हमें हमारी सुविधा की बहुत सी बहुमूल्य चीजे भेंट में दी है परंतु हम पर्यावरण को प्रदूषण दे रहे हैं। यदि हम पर्यावरण और पृथ्वी के बारे में सोचेंगे तो प्रदूषण से बचा जा सकता है।


पर्यावरण संरक्षण का अर्थ

पर्यावरण शब्द का अर्थ है परि+ आवरण अर्थात हमारे चारों ओर का वातावरण पर्यावरण संरक्षण से तात्पर्य है कि हम अपने चारों ओर के वातावरण को संरक्षित करें तथा उसे जीवन के अनुकूल बनाए रखें। पर्यावरण और प्राणी एक दूसरे पर आश्रित हैं। पर्यावरण संरक्षण न केवल मानव के लिए बल्कि अन्य सभी जीवित प्राणियों के लिए भी बहुत आवश्यक है।


पर्यावरण संरक्षण का महत्व

पर्यावरण की सुरक्षा करना हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि सभी जीवो का जीवन पूरी तरह से प्रकृति जैसे पानी, हवा आदि पर निर्भर है।इसके अलावा हम भोजन, कपड़ा आदि के लिए भी पर्यावरण पर निर्भर हैं।पर्यावरण संरक्षण का सभी जीव-जंतुओं के जीवन के साथ ही इस धरती पर मौजूद सम्पूर्ण प्राकृतिक परिवेश से गहरानाता है। सभी जीव जंतु पेड़- पौधों द्वारा छोड़े गए ऑक्सीजन के कारण ही जीवित हैं लेकिन प्रदूषण के कारण पूरी पृथ्वी प्रदूषित हो रही है, इसलिए हमें अपने पर्यावरण को सुरक्षित रखना चाहिए जिससे हमारा अस्तित्व बना रहे।
मानव सभ्यता को बचाने के लिए सन 1992 में ब्राजील में विश्व के 174 देशों का पृथ्वी सम्मेलन आयोजित किया गया। इसके पश्चात सन 2002 में जोहांसबर्ग मैं आयोजित पृथ्वी सम्मेलन में विश्व के समस्त देशों को पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने के लिए अनेक उपाय बताए गए क्योंकि पर्यावरण के संरक्षण से ही धरती पर जीवन का संरक्षण हो सकता है


पर्यावरण को सुरक्षित रखने के प्रमुख उपाय

पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए कई उपाय हैं, उनमें से तीन प्रमुख उपाय इस प्रकार से है।
1. पर्यावरण को हानि पहुंचाने वाली चीजों का उपयोग नहीं करना चाहिए जैसे प्लास्टिक के बैग आदि का उपयोग नहीं करना चाहिए।
2. पुनरावृति अर्थात वापस इस्तेमाल करने योग्य सामान खरीदना चाहिए जैसे कांच, कागज, प्लास्टिक की बोतल, और धातु का सामान जिसे हम दोबारा उपयोग कर सकते हैं।
3. पुनः प्रयोजन अर्थात जब कोई वस्तु जिस उपयोग के लिए बनी है, उस उपयोग में नहीं लाई जा सकती तो उसे किसी अन्य उपयोग में लाना चाहिए जैसे चीनी मिट्टी के टूटे हुए बर्तनों में पौधे लगाना, प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग किचन में सामान रखने के लिए करना आदि।

निष्कर्ष – पर्यावरण है तो मानव है।
पर्यावरण का ध्यान रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। अगर हर व्यक्ति अपनी- अपनी जिम्मेदारी समझ ले तो सभी प्रकार की गंदगी, कचरा और बढ़ती आबादी के लिए स्वयं उपाय करके पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी दे सकता है। अगर हम पर्यावरण को सुरक्षित करने के उपाय करें तो हमारी पृथ्वी की सुंदरता जो कि पर्यावरण है उसे बचाया जा सकता है तथा अपने जीवन को भी स्वच्छ और स्वस्थ बनाया जा सकता है।

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