Essay on Environmental Pollution in Hindi

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध – Essay on Environmental Pollution in Hindi

मानव जीवन सदा से ही पर्यावरण से प्रभावित रहा है। उसे अपने जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए संतुलित पर्यावरण की आवश्यकता रही है। संतुलित पर्यावरण से तात्पर्य है- पर्यावरण संबंधित सभी स्वास्थ्य वर्धक आवश्यक तत्वों का निश्चित अनुपात में रहना। किंतु जब इसमें विषैले तत्वों की अधिकता अथवा किसी अनिवार्य तत्व की अधिकता या कमी हो जाती है, तो पर्यावरण में असंतुलन पैदा हो जाता है।इसे ही पर्यावरण का दूषित होना अथवा पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं।


पर्यावरण प्रदूषण के कारण – Due to Environmental Pollution

पर्यावरण प्रदूषण के कारण–पर्यावरण में प्रदूषण का मुख्य कारण मानव की बढ़ती जनसंख्या है। जिसके स्वार्थों की पूर्ति के लिए आज मानव ने प्रक्रतिक संसाधनों का इतनी बेरहमी से दोहन करना प्रारम्भ कर दिया है कि पर्यावरण का संतुलन बिगड़ चुका है। पर्यावरन के प्रत्येक तत्व का संतुलन आज बिगड़ गया है। मानव द्वारा चलाये जाने वाले कल कारखाने से निकालने वाला धुआँ वायु को विषैला बना रहा है। साथ ही उनमें से निकालने वाला विषैले रसायन युक्त जल सीधे ही नदियों में छोड़े जाने के कारण जल भी दूषित हो रहा। प्रथवि पर केवल 1% पीने योग्य जल पाया जाता है जिसका एक बहुत बड़ा भाग नदियों मे से मिलता है।जिसे हम स्वयं ही विसाइला बनाते जा रहे हैं। मानव ने बढ़ती जनसंख्या को देखते हुये खेती कि पैदावार बढ़ाने के लिए रासायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग भी बड़े पैमाने शुरू का दिया है। जिससे भूमि भी प्रदूषित हो रही है। भूमि कि उर्वरा शक्ति खत्म होती जा रही है। जिससे भूमि के बंजर होने का खतरा भी पैदा हो रहा है। अतः हम कह सकते हैं कि पर्यावरण प्रदूषण का मुख्य कारण मानव स्वयं ही है।

बदता हुआ प्रदूषण मानव के पाटन का कारण बन सकता है। यह समस्या किसी एक देश या क्षेत्र कि नहीं है। यह एक एक वैश्विक समस्या है। इसलिए इसके निराकरन के लिए सम्पूर्ण विश्व को एक साथ मीकर काम करना होगा। प्रदूषण की समस्या का निराकरण करने के लिए आवश्यक कदम उठाने जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण करना होगा। प्रकृति वातावरण को शुद्ध बनाए रखने में सहायक रही है। इसलिए अधिकाधिक पेड़ लगाने होंगे। ऊर्जा के अनवीनीकृत साधनों को छोडकर नवीनीकृत साधनों का प्रयोग करना होगा। कारखानों से दूसित जल और धुएँ के निष्कासन का उपाय खोजना होगा और सबसे बड़ी बात है सादगी पूर्ण जीवन यापन करना होगा।सभी देशों कीसरकारों को प्रदूषण को रोकने संबंध में उचित कानून लागू करने होंगे तथा उनका सख्ती से पालन करना होगा।

प्राचीन समय में पर्यावरण को देवता मानकर प्रक्रती कि पुजा कि जाती थी। सभी प्राचीन सभ्यताओं में प्रक्रती कि पुजा तथा सूर्य पुजा का वर्णन मिलता है। जिसका मतलब यह है कि हमारे पूर्वज प्रक्रतिक संसाधनों के महत्व को समझते थे। और उनका सम्मान के साथ दोहन करते थे। जो आज के मानव ने त्याग दिया है। आज मानव प्रक्रतिक संसाधनों का दोहन अंधाधुंध तरीके से कर रहा है। जिसके घटक परिणाम आज सामने आते जा रहे हैं और आगे भी यदि इसे नहीं रोका गया तो प्रथ्वी पर मानव जीवन संकट में आ जाएगा।

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