इंटरनेट पर निबंध (Essay on Internet in Hindi): Internet Nibandh for Student Kids

Internet Essay in Hindi: यहां इंटरनेट पर सबसे सरल और आसान शब्दों में हिंदी में निबंध पढ़ें। नीचे दिया गया इंटरनेट निबंध हिंदी में कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों के लिए उपयुक्त है।

Essay on Internet in Hindi (इंटरनेट पर निबंध): Short and Long

परिचय: इंटरनेट को दुनिया भर के कंप्यूटर-नेटवर्क का एक समग्र या सामूहिक संपर्क सूत्र के रूप में समझा जा सकता है। यह सूचना-तकनीक की सबसे आधुनिक प्रणाली है। इंटरनेट किसी एक सरकार या कंपनी के अधीन नहीं है  बल्कि इसमें बहुत से ‘सर्वर’ जुड़े होते हैं, जो अलग-अलग संस्थानों से संबंधित होते हैं, जैसे — वर्ल्ड वाइड वेब, गोफर, फ़ाइल ट्रांसफ़र प्रोटोकॉल आदि। जो हमें विश्वस्तरीय नेटवर्क से जोड़ते हैं, और विभिन्न सूचनाओं व आंकड़ों को सुलभ बनाते हैं। वस्तुतः इंटरनेट ‘क्लाइंट-सर्वर ऑर्कीटेक्चर’ के आधार पर चलता है। जिसमें हम जिस भी कंप्यूटर अथवा मोबाइल के माध्यम से इंटरनेट से जुड़ते हैं वह क्लाइंट, और जहां संबंधित सूचनायें या आंकड़े संग्रहीत रहते हैं उसे ‘सर्वर’ कहते हैं।

कार्यविधि: ‘इंटरनेट’ पर मौज़ूद सूचनायें देखने को हम ‘वेब-ब्राउज़र’ का प्रयोग करते हैं; जो ‘क्लाइंट-प्रोग्राम’ होते हैं। ये ‘हाइपर-टैक्सट’ से संवाद स्थापित कर उन्हें प्रदर्शित करने में कुशल व सक्षम होते हैं। जिसके ज़रिये हम इंटरनेट पर मौज़ूद तरह-तरह की सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।

संक्षिप्त इतिहास: सन् 1969 में अमेरिकी का विभाग के वैज्ञानिकों ने विभिन्न कंप्यूटरों को जोड़ने हेतु ‘आर्पानेट’ नेटवर्क विकसित किया। स्विचिंग तकनीक पर आधारित यह विश्व का पहला कंप्यूटर-नेटवर्क था। जिससे कालांतर में इंटरनेट का विकास संभव हुआ। दरअसल शीत-युद्ध के समय अमेरिका को एक प्रामाणिक, व्यापक और विश्वसनीय संचार-सेवा की ज़ुरूरत पड़ी, जिसके चलते ‘आर्पानेट’ अस्तित्व में आया। शुरू में इसे मात्र चार कंप्यूटरों से जोड़ा गया, पर अगले तीन वर्ष में, यानी 1972 तक 37 कंप्यूटर इसमें जुड़ चुके थे। और उसके अगले वर्ष इसका विस्तार इंग्लैण्ड और नार्वे जैसे देशों तक हो चुका था। सन् 1974 आते-आते यह आम लोगों को भी उपलब्ध हो गया, साथ ही इसे ‘टेलनेट’ कहा जाने लगा। फिर 1982 ई. में इस नेटवर्क के प्रयोग के लिये कुछ सामान्य व सर्वमान्य नियम बनाये गये, जिन्हें ‘प्रोटोकॉल’ नाम दिया गया। इसे ‘ट्रांसमिशन कंट्रोल’ या ‘इंटरनेट-प्रोटोकॉल’ कहा गया। आगे 1990 में ‘आर्पानेट’ का समापन कर दिया गया; और सभी कंप्यूटर्स के एक समेकित नेटवर्क के रूप में ‘इंटरनेट’ काम करता रहा। इस तरह हमारी यह दुनिया एक नई दुनिया से रूबरू हुई, जिसे इंटरनेट की दुनिया कह सकते हैं। भारत में वीएसएनएल यानी ‘विदेश संचार निगम लिमिटेड’ इंटरनेट-सेवा प्रदान करती है।

उपयोग: आज शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र बचा हो जहां इंटरनेट उपयोगी न हो। ऑनलाइन बिलिंग, शॉपिंग, व्यापार, शेयर-बाजार, सलाह, जानकारियां, रोजगार, फ्रीलांसिंग, मनोरंजन, टीवी और अब कोरोनाकाल के समय से ‘वर्क फ़्रॉम होम’ हर जगह ‘इंटरनेट’ अपरिहार्य सा हो चुका है। इसके माध्यम से आप संसार के किसी भी कोने से लोगों से जुड़ सकते हैं।

नुकसान: जब हम बेवज़ह ‘इंटरनेट की दुनिया’ में खोये रहते हैं, तो यह समय की बर्बादी ही है। कुछ लोगों को इसकी लत लग जाती है, जिससे फिर कई तरह के मानसिक विकार उत्पन्न होने की संभावना होती है। इसके ज्यादा प्रयोग से व्यक्ति अंतर्मुखी हो जाता है। इसके सिवा ‘इंटरनेट’ पर मौज़ूद तरह-तरह की हिंसक और अश्लील जानकारियां व दृश्य भी हमारे मनस पर गलत असर डालते हैं। यह बात विशेषतः बच्चों और किशोरों के लिये अति संवेदनशील हो जाती है। क्योंकि अब यह सबको सुलभ है। फिर ‘इंटरनेट’ के माध्यम से धोखाधड़ी, या निजी जानकारियां भी चोरी हो सकती हैं। इसलिये ‘इंटरनेट’ का स्वस्थ प्रयोग ही हमें उसके लाभों से वाकिफ़ करा सकता है।

उपसंहार: ज़ाहिर है, ‘इंटरनेट’ आधुनिक मानव के हाथों आई एक नई शक्ति की तरह है। इंटरनेट’ के माध्यम से क्रांतियां भी आ चुकी हैं। ‘अरब-स्प्रिंग’ इसकी ज्वलंत मिसाल है। पर जैसा कि सभी शक्ति के नियम कहते हैं, हमें ‘इंटरनेट’ के सदुपयोग व दुरुपयोग को लेकर सदैव सचेत रहना चाहिये। यह एक बहुमूल्य और बहुआयामी शक्ति है। यदि सदुपयोग करें, तो इसमें कोई शक नहीं कि ‘इंटरनेट’ के माध्यम से हम जीवन के तमाम लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।

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