Essay in Hindi

Essay on Nature in Hindi

प्रकृति पर निबंध – Essay on Nature in Hindi

धरती पर जीवन जीने के लिए भगवान से हमें बहुमूल्‍य और कीमती उपहार के रूप में प्रकृति मिली है। प्रकृति हमारे चारों ओर सबसे सुंदर और आकर्षण जो हमें खुश करती है एंव हमें स्‍वस्‍थ रहने के लिए प्राकृतिक वातावरण प्रदान करती है। हमारी प्रकृति हमें कई प्रकार के फल, फूल, पक्षी, पेड, आदि प्रदान करती है। हमें जीवन जीने के लिए प्रकृति हर प्रकार से हमारी मदद करती है पंरतु इन सभी चीजों को मनुष्‍य अपने लालच के लिए नष्‍ट करता जा रहा है। पंरतु हमें प्रकृति को नुकसान नही पहुचाना चाहिए। बल्‍कि उसकी भलाई के लिए हमें पेड पौधे लगाने चाहिए।

हमारी प्रकृति हमें जीवन जीने व आनंद के लिए सुंदर वातावरण प्रदान करती है इसलिए इस वातावरण को साफ रखने व नुकसानों से बचाने की जिम्‍मेदारी भी हमारी है। आज कल मानव अपने लाभ के लिए इतना स्वार्थी होता जा रहा है कि वह प्रकृति के प्रति अपनी जिम्‍मेदारियों को भी भूलता जा रहा है। जिसके परिणाम स्‍वरूप मानव को हर दिन एक नई प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड रहा है। प्रकृति हमारे लिए एक ऐसा वरदान है जिसकी तुलना हमारी मां से की जाती है और जो हमारा लालन पोषण करती है। सुबह जल्‍दी प्रकृति के गोद में टहलने से हम स्‍वस्‍थ और मजबूत बनते है साथ ही ये हमें कई सारी घातक बीमारियों जैसे डायबिटिज, उच्‍च रक्‍त चाप लिवर संबंधी आदि समस्‍याओं को दूर करने में काफी लाभ पहुचाती है। जिससे हमारा तन और दिमाग दोनों स्‍वस्‍थ रहते है। ये हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छा है कि हम प्रकृति के द्वारा रचित जीव जं‍तुओं की रक्षा करे और इस प्रकृति की चीजों का आनंद उठाए। ज्‍यादातर कवि, लेखक और लोगों को अपने दिमाग, शरीर और आत्‍मा के दुवारा से ऊर्जात्‍मक बनाने के लिए योगा और ध्‍यान करते देखा जा सकता है। प्रकृति न केवल खुशी का स्‍त्रोत है बल्‍कि शिक्षा का भी स्‍त्रोत है। फलों के झुकी हुई पेड हमें विनम्र होना सिखाते है। बडे-बडे पहाड हमें यह सीखाते है कि हमें कभी भी अपने लक्ष्‍य से भटकना नही चाहिए बल्‍कि उसका डटकर सामना करना चाहिए। फूल हमें मुस्‍काराहट सिखाते है प्रकृति हमारे लिए आनंद का एक स्‍त्रोत है क्‍योंकि इससे जीवन की उपलब्‍धियों का पता चलता है। प्रकृति ईश्‍वर की अभिव्‍यक्‍ति है। मनुष्‍य और प्रकृति के बीच एक संबंध है इसलिए प्रकृति का प्रेम मनुष्‍य के लिए स्‍वाभाविक है। जो व्‍यक्‍ति प्रकृति और वनस्‍पति से प्‍यार नहीं करता है वह एक विधर्मी है। क्‍योंकि वह भगवान को सर्वशक्‍तिमान और सर्वव्‍यापी के रूप में पहचानने से इंकार करता है।

पृथ्‍वी के हर एक मनुष्‍य को प्रकृति से छेड छाड किये बिना इसकी सुंदर प्रकृति का आनंद उठाना चाहिए। पर्यावरण और प्रकृति के विनाश को रोकने के लिए हमें इसे स्‍वच्‍छ रखना होगा प्रकृति ईश्‍वर द्वारा प्रदान किया गया एक अमूल्‍य उपहार है। प्रकृति ने मनुष्‍य को बहुत कुछ दिया है लेकिन मनुष्‍य ने हमेंशा इसे बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोडी है। इसलिए जितना हो सके हमें यह सोचना चाहिए कि कुछ भी काम करने से पहले हमारी प्रकृति को लाभ होगा या हानि।

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