Essay in Hindi

Essay on Spring Season in Hindi

वसंत ऋतु पर निबंध – Essay on Spring Season (Vasant Ritu) in Hindi

हमारे देश भारत को अनेक ऋतुओं का देश माना जाता है। यहां 6 ऋतुओं का आना जाना होता है। यह है – ग्रीष्म, वर्षा, शरद, शिशिर, हेमंत और वसंत। वसंत ऋतु फाल्गुन और चैत्र महीनों मं爺 रहती है। 15 जनवरी से लेकर 15 अप्रैल तक का समय वसंत ऋतु का ही होता है।
वसंत का आगमन हेमंत ऋतु के बाद होता है। इसके आने पर पूरा प्राणी जगत हर्ष और उल्लास से झूम उठता है। लोग वसंतोत्सव मनाते हैं। इसे ऋतुओं का राजा अर्थात ऋतुराज भी कहा जाता है।

इस ऋतु में न ही अधिक सर्दी होती है और ना ही अधिक गर्मी। मौसम बहुत सुहावना होता है। हल्की शीतल वायु बहा करती है। सभी इस ऋतु का आनंद उठाना चाहते हैं। ना केवल मनुष्य बल्कि अन्य सभी जीव – जंतुओं और पेड़ – पौधों में मानो नवजीवन का संचार हो जाता है।

पेड़ों पर नए नए पत्ते आते हैं। उपवन में तरह – तरह के फूल खिलने लगते हैं। रंग बिरंगी तितलियां उड़ती फिरती दिखती है। भवरे गुंजार करते फूलों पर मडराते दिखाई देते हैं। आम के पेड़ों पर बौर आने लगता है और कोयल भी मीठी आवाज में कूकने लगती है। फूलों के बाग में बहती हवा सुगंध बिखेरती है। इन दिनों प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में दिखाई देती है। वसंत के आगमन पर नई फसल पकने लगती है। खेतों में सरसों के पीले – पीले फूल खिलकर मानो धरती पर पीली चादर सी बिछा देते हैं। किसान का मन अपनी फसल को देखकर खुशी से भर जाता है।

वसंत ऋतु में हवा दक्षिण से उत्तर की तरफ बहती है। दक्षिण से आने वाली हवा शीतल मंद और सुगंधित होती है। वसंत पंचमी को ऋतुराज के आगमन में उत्सव के रूप में मनाया जाता है। वसंत पंचमी के दिन लोग झूला झूलते हैं और अपनी प्रसन्नता को व्यक्त करते हैं। लोग सुबह से लेकर शाम तक पतंग उड़ाते हैं। लोग बसंती हलवा या केसरिया खीर बनाते हैं। इस दिन लोग पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं।

वसंत पंचमी के दिन ज्ञान की देवी सरस्वती जी का जन्म हुआ था। इस दिन सरस्वती पूजन किया जाता है। कई विद्यालयों में, स्कूलों में इस दिन सरस्वती पूजा होती है और उसके बाद मिठाई भी बांटी जाती है। इसके अतिरिक्त वसंत ऋतु में महाशिवरात्रि भी आती है और रंगों का त्योहार होली भी। होली का त्यौहार वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला सबसे प्रमुख त्योहार है। इस दिन लोग रंग गुलाल खेलते हैं और नाचते गाते हैं। घरों में गुजिया आदि तरह-तरह के पकवान भी बनाते हैं। कुछ स्थानों पर कृष्ण – गोपियों की रासलीला भी होती है।

इस ऋतु में स्वास्थ्य लाभ के लिए सुबह – सुबह उठकर घूमने जाना चाहिए और प्रकृति के सौंदर्य का आनंद लेना चाहिए। यह ऋतु ईश्वर का एक वरदान है और हमें इस अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए। परिवर्तनशीलता प्रकृति का नियम है। शिशिर ऋतु के बाद वसंत ऋतु आती है और संदेश देती है कि जिस तरह कड़कड़ाती सर्दी के बाद यह सुहाना मौसम आया है, उसी तरह मनुष्य के जीवन में भी दुख के बाद एक दिन सुख का आगमन भी होता है।
वर्तमान में लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए पेड़ – पौधों को काटकर हरियाली को लगभग समाप्त कर दिया है। इसलिए वसंत का स्वरूप भी बदल गया है। हमें इस ओर ध्यान देना चाहिए पर्यावरण की सुरक्षा के लिए काम करने चाहिए। ताकि वसंत ऋतु अपनी विशेषता ना खो दे।

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