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Mahatma Gandhi Setu Bihar – महात्मा गांधी सेतु

Mahatma Gandhi Setu- बिहार के महात्मा गांधी सेतु के बारे में पढ़े सामान्य ज्ञान तथ्य हिंदी में

Mahatma Gandhi Setu- बिहार भारत का एक ऐसा राज्य है जो अपनी संस्कृति, पुरानी विरासत और गाँवों की खूबसूरत तस्वीर के लिए मशहूर है. बिहार के लोगों का रहन-सहन और उनकी परंपराएँ इस राज्य को देशभर में एक अलग एक पहचान दिलाती हैं. बिहार में कई ऐतिहासिक और आधुनिक और प्राचीनतम निर्माण हैं जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. इन्हीं निर्माणों में बिहार के पुल भी शामिल हैं जो राज्य के एक इलाके को दूसरे इलाके से जोड़ते हैं. क्या आप जानते हैं कि बिहार का सबसे लंबा पुल कौन सा है? इस लेख में इसके बारे में जानेंगे.

बिहार में वर्तमान में कुल जिले

सबसे पहले यह जान लेते हैं कि बिहार राज्य में अभी यानी वर्तमान में कुल 38 जिले हैं. बिहार की अधिकतर आबादी गाँवों में रहती है, जो यहाँ की संस्कृति को और भी समृद्ध बनाती है.

बिहार का सबसे लंबा सेतु/पुल

हम बता दें की , बिहार का सबसे लंबा पुल महात्मा गांधी सेतु है, जिसे लोग गंगा सेतु के नाम से भी जानते हैं.

इस पुल की कुल लंबाई

बिहार के महात्मा गांधी सेतु की लंबाई करीब 5.75 किलोमीटर (3.50 मील) है, जो इसे बिहार का सबसे लंबा पुल बनाता है.

किस नदी पर बना यह पुल

यह पुल गंगा नदी पर बना हुआ है, जो भारत की सबसे पवित्र और लंबी नदियों में से एक है. गंगा नदी उत्तराखंड के गोमुख से निकलकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होते हुए बंगाल की खाड़ी में जाकर मिल जाती है.

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यह पुल बिहार के किन हिस्सों को जोड़ता है?

महात्मा गांधी सेतु उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार को आपस में जोड़ता है, जिससे दोनों हिस्सों के बीच की दूरी कम हो जाती है और यातायात आसान होता है.

इस पुल को बनाने में कितना समय लगा?

इस पुल का निर्माण कार्य 10 साल में पूरा हुआ था. गैमन इंडिया कंपनी ने 1972 में इसका निर्माण शुरू किया था और 1982 में यह पूरा हुआ. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका उद्घाटन किया था. इसकी सेतु की कुल लागत 87.22 करोड़ रुपये (872.2 मिलियन रुपये) थी.

महात्मा गांधी सेतु न सिर्फ बिहार बल्कि भारत का तीसरा सबसे लंबा नदी पुल भी है यह सेतु बिहार राज्य की प्रगति का प्रतीक है, बल्कि यहाँ के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण यातायात मार्ग भी है.

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