Global warming essay in Hindi [800 Words] – ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध
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ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (Essay on Global warming in Hindi) [800 words]
प्रस्तावना:
ग्लोबल वार्मिंग(वैश्विक/भूमंडलीय+गरम होना=भूमंडल का गर्म होना) भारत ही नहीं अपितु वैश्विक स्तरीय समस्या है अक्सर लोग एक दूसरे से कहते हैं, आजकल तापमान बहुत अधिक है, बारिश अधिक हो रही है, कई बाढ़ आ रही है, कहीं सूखा तो कहीं ग्लेशियर/बर्फ पिघलने,विभिन्न पौधों और जंतुओं की प्रजातियां विलुप्त होने जैसे घटनाओं की जानकारी मिलती है, वार्षिक मौसमी ऋतुओं की अवधि में अनिश्चित परिवर्तन हो जाना यह सब ग्लोबल वार्मिंग के ही प्रभाव है . ग्रीनहाउस गैसेस(कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड,ओजोन,मीथेन, क्लोरोफ्लोरोकार्बन) की अधिकता के कारण दिनों-दिन हमारी पृथ्वी का तापमान बढ़ते जा रहा है यह तापमान में बढ़ोतरी ही ग्लोबल वार्मिंग या वैश्विक तापन है. इसी कारण उपरोक्त सभी घटनाएं आज हमारे सामने विद्यमान है.
ग्लोबल वार्मिंग के कारण:
हम प्रत्येक दिन जीवाश्म ईंधन का सर्वाधिक उपयोग करते हैं
जीवाश्म ईंधन(fossil fuels) का अधिक उपयोग: मुख्य रूप से कार्बन और हाइड्रोजन बांड से मिलकर बनता है. जीवाश्म ईंधन को तीन प्रकार में बांटा गया है जो सभी ऊर्जा प्रावधान के लिए उपयोग किए जाते हैं कोयला(Coal), तेल(Oil) और प्राकृतिक गैस(Natural Gas) इन उत्पादों का एक प्रमुख उपयोग ईंधन के रूप में, कारों के लिए गैसोलीन, जेट ईंधन, हीटिंग तेल और बिजली उत्पन्न करने के लिए प्राकृतिक गैस जो ग्लोबल वार्मिंग गैसे कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन करने के लिए उत्तरदाई है.
बढ़ती गहन कृषि: अधिक उत्पादन के लिए आज का किसान बहुत मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कर रहा है जिससे रासायनिक उर्वरकों से बहुतायत में नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन हो रहा है कृषि कार्य हेतु उपयोग किए जा रहे जंतु भी अपनी पाचन क्रिया में मिथेन गैस का बहुतायत मात्रा में निष्कासन करते हैं जो ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या को जन्म दे रहे हैं.
अपशिष्ट प्रबंधन: अपशिष्ट पदार्थों विभिन्न वस्तुओं का अनावश्यक कचरा जो ठोस, द्रव और गैस अवस्था में हो सकते हैं जिसका पुनः उपयोग में लाने हेतु पुन:र्चक्रण किया जाता है जिसके सही तरीके से प्रबंधन न होने से जहरीली और मीथेन जैसे गैसों का अधिक उत्पादन होता है जो वैश्विक तापन को बढ़ाता है.
वन और पेड़ों की कटाई: मनुष्य अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए उनके अस्तित्व को समाप्त करते जा रहा है जैसा कि हम सब जानते हैं पौधे अपना भोजन फोटोसिंथेसिस के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करता है और ऑक्सीजन को वातावरण में छोड़ता है जिससे हमें और सभी जीव-जंतुओं को शुद्ध ऑक्सीजन प्राप्त होती है. और इनकी कटाई पर कार्बन की मात्रा खुले वातावरण में छोड़ दी जाती है.
अत्यधिक खनन में वृद्धि: खनन से पर्यावरण पर गंभीर रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिसमें जैव विविधता की हानि, कटाव, सतही जल का दूषित होना, भूजल और मिट्टी शामिल हैं. अक्सर धातु निर्माण वाले उद्योग इसका बहुतायत में उपयोग कर रहे हैं धातु के निष्कासन और उत्पाद के परिवहन तक कई ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं.
ग्लोबल वार्मिंग का दुष्प्रभाव / खतरे:
- जीवन के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां और विलुप्तकरण में वृद्धि पृथ्वी का तापमान बढ़ जाएगा सभी मानव जाति, वनस्पति जीवन और पशु-पक्षियों के लिए सभी अनुकूल परिस्थितियां प्रतिकूल हो जाएगी, अध्ययन के अनुसार कई अधिकतर कशेरुक प्रजातियां(vertebrate species) अधिक संख्या में विलुप्त होने लगी है . वे मौसमी व्यवहार और पारंपरिक प्रवासन पैटर्न भी बदल रहे हैं. जलवायु परिवर्तन के कारण विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है.
- ग्लेशियर का पिघलना और समुद्री जलस्तर में वृद्धि :- अधिक तापमान के कारण घाटी पहाड़ियों पर स्थित ग्लेशियर पिघलने लगेंगे समुद्र के तापमान में भी वृद्धि होने लगेगी जलीय जीवन संकट में आ सकते हैं और समुद्र का जलस्तर वास्तविक स्थिति से बढ़ जाएगा जिससे बाढ़ जैसी स्थितियां तटीय राज्यों और आइसलैंड को जलमग्न कर सकते हैं.
- महासागर का अधिक अम्लीयकरण एक समस्या बनते जा रहा है इसके लिए माननीय उत्सर्जन उत्तरदाई है जो समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र को बिगाड़ रहे हैं. समुद्र के किनारे स्थित तटीय राज्य के समुद्री जलीय-जीव व्यवसाय पर निर्भर है उनको भी दीर्घकालिक आर्थिक जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है .
- मौसम और पर्यावरण परिवर्तन आ जाएगा और मृत्यु दर में उच्च स्तरीय बढ़ोतरी होने लगेगी बढ़ते तापमान और ओजोन बढ़ने से वायु प्रदूषण भी बिगड़ता है, जो दोपहिया वाहन,कार, प्रदूषित दुआ उत्पन्न करने वाले कारखानों और अन्य स्रोतों से प्रदूषण होने पर सूरज की रोशनी और गर्मी में प्रतिक्रिया करता है. ओजोन(O3) स्मॉग का मुख्य घटक है, डस्टीयर एयर(गंदी प्रदूषित हवाएं) अस्थमा के रोगियों के लिए उच्च मृत्यु दर से जुड़ा हुआ है. यह हृदय या फेफड़े के रोग से पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य को खराब करता है. गर्म तापमान(high temprature) में भी वायुजनित पराग में काफी वृद्धि होती है, उन लोगों के लिए बुरी खबर है जो तेज बुखार और अन्य एलर्जी जैसे रोगों से पीड़ित होते हैं.
उपसंहार:
हमें सुनिश्चित करना होगा कि ग्लोबल वार्मिंग के लिए उत्तरदाई ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए सरकार ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व के मानव समुदाय को प्रयास करना होगा और अधिक से अधिक वृक्षारोपण, जीवाश्म ईंधनों की जगह सौर ऊर्जा जैसे विकल्पों को चुनना होगा.