केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35A हटाने के फैसला किया और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 A हटाने के लिए एक संकल्प पेश किया था. प्रस्ताव रखने के बाद संविधान आदेश 2019 के तहत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अनुच्छेद 370 हटाने के लिए अधिसूचना जारी की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35A हटा दिया. इस अनुच्छेद के हटने के बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनेंगे और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के बाद यह फैसला लागू हो गया है.

अनुच्छेद 370: 17 अक्टूबर 1949 को भारत के संविधान में पहली बार अनुच्छेद 370 को जोड़ा गया था इस समझोते के तहत केंद्र को सिर्फ विदेश, रक्षा और संचार मामलों में दखल का अधिकार मिला था. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है की अब जम्मू कश्मीर दिल्ली और पुड्डुचेरी की तरह केंद्र शासित प्रदेश रहेगा और वहा भी विधानसभा होगी और लद्दाख अब चंडीगढ़ की तहत होगा जिसमे कोई विधानसभा नहीं होगी.

अनुच्छेद 35-A: भारतीय संविधान में वर्ष 1954 में राष्ट्रपति के आदेश पर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिया गया था. जिसमे तहत जम्मू-कश्मीर राज्य के निवासी राज्य के बाहर संपत्ति नहीं ख़रीद सकते और राज्य के बाहर के लोग राज्य सरकार की नौकरी नहीं कर सकते. वर्ष 1954 में राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने संविधान में एक नया अनुच्छेद 35 A जोड़ दिया था.

जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में संशोधन:
गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा पेश किये गए इस बिल के तहत जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में संशोधन किया गया. इस संशोधन के बाद अब अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रहने वाले लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा और अगर कोई भी व्यक्ति जो पिछड़े क्षेत्रों, नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतराष्ट्रीय सीमा (आईबी) से सुरक्षा कारणों से चला गया हो उसे भी आरक्षण का फायदा मिल सकेगा.

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