इंटरनेट पर निबन्ध – Essay On Internet in Hindi

Internet Essay – यहाँ पर आप इंटरनेट पर निबन्ध (Essay On Internet in Hindi) के सरल उदाहरण प्रकाशित किए गए है.

नीचे दिया गया इंटरनेट निबंध हिंदी में कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों के लिए उपयुक्त है।

इंटरनेट पर निबंध

इंटरनेट – इंटरनेट की आज सारी दुनिया गुलाम है। इंटरनेट के प्रादुर्भाव में मानव जीवन में अभूतपूर्व क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं। आज व्यक्ति इंटरनेट के माध्यम से घर बैठे ही सारी दुनिया की जानकारी प्राप्त कर सकता है। इंटरनेट कोनेटवर्कों का जाल भी कहा जाता है। आज इंटरनेट के द्वारा व्यक्ति रोजमर्रा के काम, आवश्यक वस्तुओं की खरीद फरोख्त, व्यापारिक लेन-देन, पढ़ाई, सरकारी काम, ऑफिस वर्क, फिल्म देखना, गाना सुनना,सूचनाएं एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना सभी कार्य कर रहा है। यदि कभी कबार दुर्भाग्यवश नेट का सर्वर डाउन होता है तो यह सभी काम एकाएक रुक जाते हैं और आम जनजीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।

वर्तमान समय में इंटरनेट अत्यधिक शुगम तथा उपयोगीहै क्योंकि इसका उपयोग शिक्षण संस्थाओं, बैंकिंग संस्थाओं, रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप, हवाई अड्डा, प्रशिक्षण संस्थान सभी जगह उपयोग होता है।कई सरकारी तथा प्राइवेट संस्थाओं में कोई भी कार्य करवाने के लिए व्यक्तियों को काफी मशक्कत करनी पड़ती थी तथा जानकारी प्राप्त करने के लिए भी काफी मेहनत करनीपड़तीथी परंतु वर्तमान समय में सरकारी तथा प्राइवेट संस्थाओं के डिजिटलीकरण होने से आज व्यक्ति घर बैठे ही सारे काम तथा सारी जानकारियां प्राप्त कर रहा है, अगर मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के मद्देनजर देखे तो बिजली का बिल, पानी का बिल, ईएमआई का भुगतान सभी घर बैठे कर रहे है, उन्हें कहीं जाने आने की आवश्यकता नहीं, साथ ही उन्होंने महामारी की संकटकालीन दौड़ में लगाई गई लोक डाउन में जहां लोगों को घर से बाहर निकलने की मनाही थी उस समय इंटरनेट लोगों के लिए अति महत्वपूर्ण साबित हुआ। पूरे कोरोना काल में स्कूल कॉलेज की क्लासेस, परीक्षाएं, सरकारी प्राइवेट संस्थानों का ऑफिस वर्क सब लोगों ने ऑनलाइन तरीके से ही किया तथा मीटिंग्स वर्चुअल तरीके से की गई।

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भारत में मोबाइल इंटरनेट अत्यधिक प्रचलित है जिनमें 2G 3G 4G प्रकार के इंटरनेट उपलब्ध है, साथ ही 5G की टेस्टिंगकी जा रही है। यदि वैश्विक स्तर पर देखा जाए अत्याधुनिक तकनीकों के लिए प्रसिद्ध जापान ने 7Gकी टेस्टिंग पूरी कर ली है। मोबाइल इंटरनेट के अलावा कुछ और नेटवर्क भी प्रचिलत है जैसे डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन, ब्रॉडबैंड तथा सैटेलाइट, इंटरनेट।
यह सभी इंटरनेट के प्रकार हैं जो अलग अलग तरीके से इंटरनेट के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बहुत सारे कम्प्यूटर और नेटवर्को का आपस में जुड़ना इंटरनेट कहलाता है। इंटरनेट से जुड़े प्रत्येक कम्प्यूटर की अपनी एक पहचान होती है। जिसके द्वारा उस कम्प्यूटर को इंटरनेट में पहचाना जाता है। इस पहचान को IP Address कहते हैं। यह एक प्रकार से Computer का Address होता है। लेकिन पहचान का कार्य भी करता है। IP Address Computer को DNS के द्वारा नाम दिया जाता है। जिसे डोमेन नेम कहते हैं। यह डोमेन नाम Computer के IP Address को ही प्रस्तुत करता है।

इंटरनेट मानव जीवन का महत्वपूर्ण अंग बन गया है, शिक्षा के क्षेत्र में, चिकित्सा के क्षेत्र में तथा शोधार्थियों के लिए भी यह अत्यंत उपयोगी है, लेकिन इंटरनेट के कुछ दुष्प्रभाव भी है जैसे लोग इसके सहयोग से साइबर अपराध करते है, लोगो की बैंक डिटेल जानकर तथा उनकी निजी जानकारी जुटा कर उनसे ठगी करते है, जो अत्यधिक चिंताजनक है।

इंटरनेट पर निबंध 600 शब्दों में

इंटरनेट का परिचय:

इंटरनेट को दुनिया भर के कंप्यूटर-नेटवर्क का एक समग्र या सामूहिक संपर्क सूत्र के रूप में समझा जा सकता है। यह सूचना-तकनीक की सबसे आधुनिक प्रणाली है। इंटरनेट किसी एक सरकार या कंपनी के अधीन नहीं है बल्कि इसमें बहुत से ‘सर्वर’ जुड़े होते हैं, जो अलग-अलग संस्थानों से संबंधित होते हैं, जैसे — वर्ल्ड वाइड वेब, गोफर, फ़ाइल ट्रांसफ़र प्रोटोकॉल आदि। जो हमें विश्वस्तरीय नेटवर्क से जोड़ते हैं, और विभिन्न सूचनाओं व आंकड़ों को सुलभ बनाते हैं। वस्तुतः इंटरनेट ‘क्लाइंट-सर्वर ऑर्कीटेक्चर’ के आधार पर चलता है। जिसमें हम जिस भी कंप्यूटर अथवा मोबाइल के माध्यम से इंटरनेट से जुड़ते हैं वह क्लाइंट, और जहां संबंधित सूचनायें या आंकड़े संग्रहीत रहते हैं उसे ‘सर्वर’ कहते हैं।

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इंटरनेट की कार्यविधि:

‘इंटरनेट’ पर मौज़ूद सूचनायें देखने को हम ‘वेब-ब्राउज़र’ का प्रयोग करते हैं; जो ‘क्लाइंट-प्रोग्राम’ होते हैं। ये ‘हाइपर-टैक्सट’ से संवाद स्थापित कर उन्हें प्रदर्शित करने में कुशल व सक्षम होते हैं। जिसके ज़रिये हम इंटरनेट पर मौज़ूद तरह-तरह की सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इंटरनेट का इतिहास:

सन् 1969 में अमेरिकी का विभाग के वैज्ञानिकों ने विभिन्न कंप्यूटरों को जोड़ने हेतु ‘आर्पानेट’ नेटवर्क विकसित किया। स्विचिंग तकनीक पर आधारित यह विश्व का पहला कंप्यूटर-नेटवर्क था। जिससे कालांतर में इंटरनेट का विकास संभव हुआ। दरअसल शीत-युद्ध के समय अमेरिका को एक प्रामाणिक, व्यापक और विश्वसनीय संचार-सेवा की ज़ुरूरत पड़ी, जिसके चलते ‘आर्पानेट’ अस्तित्व में आया। शुरू में इसे मात्र चार कंप्यूटरों से जोड़ा गया, पर अगले तीन वर्ष में, यानी 1972 तक 37 कंप्यूटर इसमें जुड़ चुके थे। और उसके अगले वर्ष इसका विस्तार इंग्लैण्ड और नार्वे जैसे देशों तक हो चुका था। सन् 1974 आते-आते यह आम लोगों को भी उपलब्ध हो गया, साथ ही इसे ‘टेलनेट’ कहा जाने लगा। फिर 1982 ई. में इस नेटवर्क के प्रयोग के लिये कुछ सामान्य व सर्वमान्य नियम बनाये गये, जिन्हें ‘प्रोटोकॉल’ नाम दिया गया। इसे ‘ट्रांसमिशन कंट्रोल’ या ‘इंटरनेट-प्रोटोकॉल’ कहा गया। आगे 1990 में ‘आर्पानेट’ का समापन कर दिया गया; और सभी कंप्यूटर्स के एक समेकित नेटवर्क के रूप में ‘इंटरनेट’ काम करता रहा। इस तरह हमारी यह दुनिया एक नई दुनिया से रूबरू हुई, जिसे इंटरनेट की दुनिया कह सकते हैं। भारत में वीएसएनएल यानी ‘विदेश संचार निगम लिमिटेड’ इंटरनेट-सेवा प्रदान करती है।

इंटरनेट के उपयोग:

आज शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र बचा हो जहां इंटरनेट उपयोगी न हो। ऑनलाइन बिलिंग, शॉपिंग, व्यापार, शेयर-बाजार, सलाह, जानकारियां, रोजगार, फ्रीलांसिंग, मनोरंजन, टीवी और अब कोरोनाकाल के समय से ‘वर्क फ़्रॉम होम’ हर जगह ‘इंटरनेट’ अपरिहार्य सा हो चुका है। इसके माध्यम से आप संसार के किसी भी कोने से लोगों से जुड़ सकते हैं।

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इंटरनेट के नुकसान:

जब हम बेवज़ह ‘इंटरनेट की दुनिया’ में खोये रहते हैं, तो यह समय की बर्बादी ही है। कुछ लोगों को इसकी लत लग जाती है, जिससे फिर कई तरह के मानसिक विकार उत्पन्न होने की संभावना होती है। इसके ज्यादा प्रयोग से व्यक्ति अंतर्मुखी हो जाता है। इसके सिवा ‘इंटरनेट’ पर मौज़ूद तरह-तरह की हिंसक और अश्लील जानकारियां व दृश्य भी हमारे मनस पर गलत असर डालते हैं। यह बात विशेषतः बच्चों और किशोरों के लिये अति संवेदनशील हो जाती है। क्योंकि अब यह सबको सुलभ है। फिर ‘इंटरनेट’ के माध्यम से धोखाधड़ी, या निजी जानकारियां भी चोरी हो सकती हैं। इसलिये ‘इंटरनेट’ का स्वस्थ प्रयोग ही हमें उसके लाभों से वाकिफ़ करा सकता है।

इंटरनेट पर उपसंहार:

ज़ाहिर है, ‘इंटरनेट’ आधुनिक मानव के हाथों आई एक नई शक्ति की तरह है। इंटरनेट’ के माध्यम से क्रांतियां भी आ चुकी हैं। ‘अरब-स्प्रिंग’ इसकी ज्वलंत मिसाल है। पर जैसा कि सभी शक्ति के नियम कहते हैं, हमें ‘इंटरनेट’ के सदुपयोग व दुरुपयोग को लेकर सदैव सचेत रहना चाहिये। यह एक बहुमूल्य और बहुआयामी शक्ति है। यदि सदुपयोग करें, तो इसमें कोई शक नहीं कि ‘इंटरनेट’ के माध्यम से हम जीवन के तमाम लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।

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