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Maharshi Patanjali Biography in Hindi

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महर्षि पतंजलि सम्भवत: पुष्यमित्र शुंग (195-142 ई.पू.) के शासनकाल में थे. आज हम लोगो के लिए योग का ज्ञान अगर सुलभता से उपलब्ध है, तो इसका श्री महर्षि पतंजलि को ही जाता हैं, पहले योग के सूत्र बिखरे हुए थे. उन सूत्रों में से योग को समझना बहुत मुश्किल था. इस समस्या को समझते हुए महर्षि पतंजलि ने योग के 195 सूत्रों को इकठ्ठा किया और अष्टांग योग का प्रतिपादन किया.

कालान्तर में महर्षि पतंजलि के प्रतिपादित 195 सूत्र योग दर्शन के स्तम्भ माने गए. पतंजलि ही पहले और एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे. जिन्होंने योग को आस्था, अंधविश्वास और धर्म से बहार निकालकर एक सुव्यवस्थित रूप दिया था.

महर्षि पतंजलि अपने तिन प्रमुख कार्यों के लिए विख्यात हैं. प्रथम तो व्याकरण की पुस्तक ‘महाभाष्य’ के लिए तथा दूसरी ‘पाणिनि अष्टाध्यायी का टिका’ लिखने के लिए और तीसरा व् सबसे प्रमुख ‘योग शास्त्र यानी की (पतंजलि योग सूत्र) की रचना के लिए ये विशेष रूप से जाने जाते हैं. महर्षि पतंजलि ने महाभाष्य की रचना काशी में की, काशी में ‘नागकुआं’ नमक स्थान पर इस ग्रन्थ की रचना हुई थी. नाग पंचमी के दिन इस कुँए के पास अब भी अनेक विद्दान एवं विधार्थी एकत्र होकर संस्कृत व्याकरण के सम्बन्ध में शास्त्रार्थ करते हैं. महाभाष्य व्याकरण का ग्रन्थ हैं, किन्तु इसमें साहित्य, धर्म, भूगोल, समाज, रहन-सहन आधी से सम्बंधित तथ्य मिलते हैं.

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