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Asked in: बिहार बी.एड. कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) परीक्षा, 8-4-2023

“साहित्य तो एक सात्विक जीवन है. उसे कठिन तपस्या और महान् यज्ञ समझना चाहिए. जहाँ व्यक्ति के व्यक्तित्व के कोई स्वतंत्र विषय नहीं रह जाते. उच्च साहित्य की यह भाव-भूमि है. वहाँ अपरिग्रह का साम्राज्य है, फोटो नहीं छापे जाते. वहाँ वाणी मौन रहती है. ‘गाथा’ गाने में सुख नहीं मानती. उस उच्च स्तर से जितने क्रियाकलाप होते हैं, आत्म-प्रेरणा से होते हैं, पर आज दिन हिन्दी में आत्म-प्रेरणा और ‘आत्मकथा’ का नाम लेना पाखण्ड बढाना है. हमारे देश में आत्मकथा लिखने की परिपाटी नहीं रही.”

16. उच्च स्तर के क्रियाकलाप किससे होते हैं ?

विकल्प: 
(A) आत्मानुभव से
(B) आत्म प्रेरणा से
(C) आत्म कथन से
(D) आत्मावलोकन से

17. किस देश में आत्मकथा लिखने की परिपाटी नहीं रही ?

विकल्प: 
(A) भारतवर्ष में
(B) उत्तर प्रदेश में
(C) रूस में
(D) अमरीका में

18. हिन्दी में किस विधा को पाखण्ड कहा गया है ?

विकल्प: 
(A) गाथा को
(B) आत्मप्रेरित संस्मरण को
(C) आत्मकथा को
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं

19. साहित्य को क्या माना गया है ?

विकल्प: 
(A) कठिन साधना और तपस्या
(B) लेखन का महान् यज्ञ
(C) कठिन तपस्या और महान् यज्ञ
(D) लेखन तपस्या और कठिन साधना

20. उच्च साहित्य की भावभूमि क्या है ?

विकल्प: 
(A) जहाँ व्यक्ति स्वतंत्र विषय नहीं चुन सकता
(B) जहाँ लेखक के व्यक्तित्व की स्वतंत्रता नहीं रहती
(C) जहाँ व्यक्ति को लिखने की स्वतंत्रता नहीं रहती
(D) जहाँ व्यक्तित्व के कोई स्वतंत्र विषय नहीं रह जाते

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