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Solar Orbiter Mission for the Study of the Sun – (सूर्य के अध्ययन के लिए सोलर ऑर्बिटर मिशन)


(सूर्य के अध्ययन के लिए सोलर ऑर्बिटर मिशन) – Solar Orbiter Mission for Research on Sun in Hindi

हाल ही में अमेरिका की अन्तरिक्ष एजेंसी नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) ने संयुक्त रूप से सौरमंडल के सबसे बड़े पिंड सूर्य के अध्ययन के लिए सोलर ऑर्बिटर मिशन लांच किया है. यह ऑर्बिटर सूर्य के उत्तरी और ध्रुवों की पहली तस्वीरें खींचेकर भेजेगा. यह ऑर्बिटर सूर्य के बारे में अध्ययन करेगा की सूर्य हमारे सोलर सिस्टम पर असर कैसे असर डालता है और सूर्य की सतह पर लगातार उड़ने वाले आवेशित कणों, हवा के प्रवाह, सूर्य के अंदर चुंबकीय क्षेत्र और इससे बनने वाले हेलिओस्फियर के संबंध की जांच करेगा. नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) के मुताबिक, सूर्य के करीब पहुंचने के लिए यह ऑर्बिटर को करीब 7 साल में करीब 4 करोड़ 18 लाख किलोमीटर की दूरी तय करेगा.


  • सोलर ऑर्बिटर को सूर्य की कक्षा तक पहुचाने के लिए “यूनाइटेड लॉन्च अलायंस एटलस वी” रॉकेट का इस्तेमाल किया गया है.
  • यह सोलर ऑर्बिटर को सूर्य तक पहुचने के लिए लगभग 7 साल का समय लगेगा.
  • यह सोलर ऑर्बिटर “ऑर्बिटर एक्लिप्टिक प्लेन” से निकलकर सूर्य के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव की तस्वीरों को खीचेगा.
  • यह सोलर ऑर्बिटर पृथ्वी और शुक्र की कक्षा से ऊपर उठकर अंतरिक्ष में स्थापित होगा. जिससे सूर्य के दोनों ध्रुवों का नजारा दिखाई देगा.
  • सूर्य के दोनों ध्रुवों को देखने के लिए इस ऑर्बिटर को 24 डिग्री तक घुमाया जाएगा.
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  • नासा के मुताबिक, अगले कुछ वर्षों में सूर्य के बारे में हमारा दृष्टिकोण बहुत बदल जायेगा.
  • सूर्य की गर्मी के बीच यात्रा करने के लिए इस सोलर ऑर्बिटर में एक खास हीट शील्ड लगायी गयी है.
  • इस सोलर ऑर्बिटर में कैल्शियम फॉस्फेट की काली कोटिंग भी लगायी गयी है जिसका इस्तेमाल हजारों वर्ष पहले गुफाओं में चित्र बनाने के लिए किया जाता था.
  • नासा के मुताबिक, अंतरिक्ष यान के टेलीस्कोप हीट शील्ड के आर-पार देखा जा सकेगा.
  • इससे पहले नासा ने 2018 में सूर्य के बाहरी कोरोना के अध्ययन के लिए पार्कर सोलर प्रोब भेजा था.
  • भारत की अन्तरिक्ष एजेंसी इसरो वर्ष 2020 के अंत में सूर्य का अध्ययन करने के लिए पहला मिशन आदित्य को भेजने की योजना बना रही है.
  • इस सोलर ऑर्बिटर मिशन से अंतरिक्ष में बनने वाली उन परिस्थितियों का अध्ययन भी किया जाएगा. जो अंतरिक्ष यात्रियों, उपग्रहों, रेडियो और जीपीएस जैसी रोजमर्रा की तकनीक को प्रभावित करती है.

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