chipko-movement-in-hindi

चिपको आन्दोलन क्या है?- चिपको आन्दोलन की शुरुआत, चिपको आन्दोलन के प्रभाव एवं परिणाम

What is Chipko Movement? – चिपको आन्दोलन की परिभाषा

चिपको आंदोलन मुख्य रूप से भारत में एक वन संरक्षण आंदोलन था. इस आंदोलन को करने का मुख्य कारण पर्यावरण-रक्षा से था. यह आन्दोलन भारत के उत्तराखंड राज्य (तब उत्तर प्रदेश का भाग) में किसानो ने वृक्षों की कटाई का विरोध करने के लिए शुरू किया था।

चिपको आन्दोलन की शुरुआत कब और कहा से हुई थी?

यह आन्दोलन तत्कालीन 1973 उत्तर प्रदेश के चमोली जिले में में प्रारम्भ हुआ। जब वन विभाग के ठेकेदारों ने कृषि औजारों द्वारा पेड़ों की कटाई को आवंटित करने आये तो कुछ महिलाये पेड़ों से चिपक गई और कहा कि पेड़ों से पहले हमे काटो और ठेकेदार के नोकर पेड़ काटने का आदेश का पालन करने में असहाय व् असमर्थ रहे और बिना पेड़ को कटे वापस चले गए इस आंदोलन मुख्य बात थी की इस आंदोलन में भारी संख्या में स्त्रियों ने भाग लिया था.

चिपको आन्दोलन में महिलाओं की भूमिका

इस आंदोलन ने कई अन्य ग्रामीण महिलाओं को प्रेरित किया, जिन्होंने 1970 में भारत के विभिन्न हिस्सों में ऐसे ही आंदोलन शुरू किए थे। यह वास्तव में आश्चर्य की बात है कि उस युग की महिलाओं को जंगलों के महत्व के बारे में अधिक जानकारी थी। भारत में ग्रामीण महिलाओं ने आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया, जो कि वनों की कटाई और इसके भविष्य के परिणामों के बारे में जानने लगी थी.

चिपको आंदोलन में सह-भागिता

चिपको आंदोलन में गांधीवादी और सत्याग्रह के तरीकों का अपना और इस आंदोलन में पुरुष और महिलाओ कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इस आंदोलन में कुछ महत्वपूर्ण महिला नेताओं ने जंगलों के संरक्षण की रोक के लिए लड़ी, जिसमे मुख्य थी श्रीमती गौरादेवी, सुदेश देवी, बचनी देवी, देव सुमन, मीरा बहन, सरला बेहन और अमृता देवी और चंडी प्रसाद भट्ट जी.

Read Also...  उत्तर प्रदेश के प्रमुख लोकगीत; जानें यूपी के लोकप्रिय लोक संगीत - Major Folk Music of Uttar Pradesh

चिपको आंदोलन नेता सुन्दरलाल बहुगुणा

चिपको आंदोलन में एक पारिस्थितिकी कार्यकर्ता सुंदरलाल बहुगुणा थे, जिन्होंने सरकार द्वारा जंगलों और हिमालय पर्वतों के विनाश के विरोध में ग्रामीणों को शिक्षित करने के लिए अपना पूरा जीवन व्यतीत किया। जिन्होंने भारत की पूर्व प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को पेड़ों के काटने पर रोक लगाने के लिए अपील की थी। उनका स्लोगन था ‘पारिस्थितिकी स्थायी अर्थव्यवस्था है’ इस आंदोलन के एक अन्य प्रमुख नेता श्री चंडी प्रसाद भट्ट थी, जिन्होंने छोटे पैमाने पर स्थानीय उद्योगों के विकास की वकालत की, जो कि स्थानीय लाभों के लिए वनों के संसाधनों के स्थायी उपयोग पर आधारित थी।

‘चिपको आन्दोलन’ का घोषवाक्य है-
क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी, पानी और बयार।
मिट्टी, पानी और बयार, जिन्दा रहने के आधार।

चिपको आंदोलन के परिणाम एवं उपलब्धि

चिपको आंदोलन की प्रमुख उपलब्धि थी की 1980 में उत्तर प्रदेश के जंगलों में 15 वर्षों तक पेड़ों को काटने के लिए प्रतिबंध। बाद में इस प्रतिबंध पर हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, बिहार, पश्चिमी घाट और विंधाह में लगाया गया था। देश के बाहर के कार्यकर्ताओं के मजबूत विरोध के बाद यह सब भारतीय प्रधान मंत्री के आदेश पर किया गया था।

सन 1987 में इस आन्दोलन को सम्यक जीविका पुरस्कार (Right Livelihood Award) से सम्मानित किया गया था।

Previous Post Next Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *