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11 नवंबर: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस – National Education Day 2025 in Hindi

National Education Day in Hindi: हमने यहाँ पर 11 नवंबर को मनाये जाने वाले राष्ट्रीय शिक्षा दिवस (National Education Day) के बारे में जानकारी प्रकाशित की है जो की अपने सामान्य ज्ञान और सरकारी नौकरी की तैयारी के सहायक होगी.

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस – National Education Day

शिक्षा ना सिर्फ मनुष्य के अंदर हर विषय के बारे में जानने और चीजों को सीखने समझने की क्षमता विकसित करती है बल्कि मनुष्य के शारीरिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से विकास करने में उसकी मदद करती है।कहते हैं कि शिक्षा सभी समस्याओं का समाधान होता है, चाहे गरीबी, अशांति या विकास की बात क्यों ना हो। इन सभी समस्याओं के समाधान का रास्ता अगर कहीं से होकर गुजरता है तो वह शिक्षा ही है।

भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 11 नवंबर को मनाया जाता है। यह मौलाना अबुल कलाम जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2008 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा अबुल कलाम जयंती पर राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाने की परंपराकी शुरुआत हुई। मौलाना अबुल कलाम आजाद महान स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद थे। आजादी के बाद इन्हें भारत का प्रथम शिक्षा मंत्री बनाया गया। मौलाना अबुल कलाम का जन्म 11 नवंबर 1988 को सऊदी अरब के मक्का शहर में हुआ था। भारत में शिक्षा के प्रचार-प्रसार और स्थूल पड़ी शिक्षा व्यवस्था को पुनर्जीवित करने में मौलाना अबुल कलाम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1947 से 1958 तक लगातार शिक्षा मंत्री के पद पर रहते हुए अपने अनुभव व कार्य को सत्ता से हमारी शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। एक राष्ट्रीय नेता होने के साथ-साथ वे एक कवि पत्रकार भी थे।

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सादा जीवन और उच्च विचार की शैली को अपनाने वाले मौलाना आजाद गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित थे। उन्होंने हिंदू मुस्लिम एकता के लिए प्रयास किये तथा खिलाफत आंदोलन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मौलाना अबुल कलाम 1952 में सांसद चुने गए और भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री बने। धरासन्न सत्याग्रह में इन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके लिए उन्हें 3 साल जेल में बिताने पड़े।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना करना उनके सबसे अविस्मरणीय कार्यों में से एक है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है। इसके उपरांत इन्हें भारत के सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

उन्होंने 11 वर्षों तक राष्ट्रीय शिक्षा नीतिका मार्गदर्शन किया और शिक्षा और संस्कृति को विकसित करने के लिए उत्कृष्ट संस्थान की स्थापना की।
मौला अबुल कलाम के साथ-साथ राजा राममोहन राय, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद,रविंद्र नाथ टैगोर जैसे नेताओं ने भी भारत की शिक्षा प्रणाली को सुधारने में योगदान दिया। उन्होंने महिला शिक्षा पर विशेष जोर दिया था।

पहली बार राष्ट्रीय शिक्षा दिवस सन् 2008 में बनाया गया था। इस दिन विश्वविद्यालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। जिसमें छात्रों को शिक्षा के महत्व से परिचित कराया जाता है। केंद्र व राज्य सरकारें इस मौके पर शिक्षा को सुधारने के लिए विभिन्न योजनाओं की घोषणाएं करतीं हैं।
मनुष्य के जीवन में शांति और विकास महत्वपूर्ण है और उसके स्कोर हासिल करने का सबसे बड़ा माध्यम शिक्षा ही हो सकती है। हर व्यक्ति और बच्चे तक मुफ्त और बुनियादी शिक्षा की पहुंच हो इस दिन को मनाने का यही मुख्य उद्देश्य है।

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