ग्लोबल वार्मिंग क्या है इसके होने के मुख्य कारण – ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव व् इससे बचाव के बारे में सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में

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ग्लोबल वार्मिंग क्या है – What is Global Warming in Hindi

पिछले कुछ दशको में हमारे भोतिक सुखो और विलासिता में बहुत वृद्धि हुई है | किन्तु इस विलास्मिता की भारी कीमत भी हमे चुकानी पढ़ रही है | रेफ्रिजरेटर , कूलरो, एयर – कंडीशनरो और दूसरी मशीनों के अधिकाधिक इस्तेमाल का नतीजा यह हुआ है की वातावरण में क्लोरो प्लोरो कार्बन में जबरदस्त वृद्धि हुई है इससे सूर्य की घातक पराबैगनी किरणों से सुरक्षा करने वाली आजोन की पर्त में छेद हो गया है पृथ्वीग्रीन हाउस मफेक्त‘ के चलते गर्म होती जा रही है पृथ्वी के अपनी समय दर से लगातार अधिक गर्म होने की प्रक्रिया को ही ‘ग्लोबल वार्मिंग’ (Global Warming) या भूमंडलियकरण ताप में वृद्धि कहा जाता है

यदि ये ग्रीन हाउस गैसे इसी रफ़्तार से बढती रही तो अगली आधी सदी में सारे विश्व का तापमान 1.5 से 4.5 डिग्री सेंटीग्रेड तक बढ सकता है जिसके कारण अनेक बीमारियों के फेलने प्राकर्तिक आपदायों के विकट होने के साथ-साथ समुद्र स्तर के बढने का खतरा पैदा हो गया है जिससे विश्व के लगभग सो करोड़ लोग व् एक तिहाई कृषि भूमि प्रभावित हो सकती है|

What is global warming in hindi

 

ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण – Main Causes of Global Warming in Hindi

जलवायु गर्म होने का मुख्य कारण ग्रीन हाउस , विशेषकर कार्बन डाईऑक्साइड का वायुमंडल में बढना है बढती जनसँख्या के कारण अन्न उत्पादन के लिए जंगलो का सफाया होता जा रहा है , लकड़ियाँ इंधन के रूप में प्रयोग की जा रही है जिससे हानिकारक गेसे में वृद्धि होती जा रही है कार्बन डाईऑक्साइड , मीथेन तथा क्लोरो – फ्लोरो कार्बन की अधिकता से दिन प्रतिदिन धरती गर्म होती जा रही है जलवायु गर्म होने का एक और कारण प्राकर्तिक संसाधनों जैसे – कोयला , खनिज तेल आदि का उघोगो में प्रयोग भी है | ओद्दोगिकीकरण के अँधा धुंध विकास से वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड के मात्र में भारी वृद्धि हो रही है|

ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) का एक अन्य कारण उपभोक्तावादी जीवन शेली भी है आज हम अपने जीवन को सुखद बनाने के लिए फ्रीज़, एयर कंडीशनर, परफ्यूम, इंधन गेसे, बिजली के उपकरणों वाहनों , तथा औशोधियो का अधिक से अधिक प्रयोग कर रहे है वे उपभोक्तावादी वस्तुएं बहुत अधिक मात्र में क्लोरो – फ्लोरो कार्बन उत्सर्जित करती है जो भूमंडलीय ताप में वृद्धि के लिए जिम्मेदार है | वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड तथा ऑक्सीजन का एक निश्चित अनुपात होता है अगर इस अनुपात में कोई परिवर्तन होता है तो वनस्पति और प्राणी दोनों प्रभावित होते है पृथ्वी पर जनसँख्या में भारी वृद्धि के कारण उसकी खाद्द जरुरतो को पूरा करने के लिए फसलो की अधिक पैदावार हेतु भारी मात्र में उर्वरको का प्रयोग किया जा रहा है जो जमीं में विखंडन के दोरान भारी मात्र में कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जित करके वायुमंडल में इसकी मात्र को बढ़ाते है उर्वरक के रूप में यूरिया का प्रयोग सबसे अधिक होता है यह भारी मात्र में कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन करता है जो भूमंडलीय ताप को बढ़ाने के लिय जिम्मेदार है | अत: बढती रही जनसँख्या , प्राक्रतिक संसाधनों का अंधाधुंध दुरुप्रयोग , उपभोक्तावादी जीवन शेली , अद्दोगीकरण तथा विज्ञान और तकनिकी उन्नति मुख्यत: ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार है

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव – Impact of Global Warming in Hindi

यदि ग्रीन हाउस गेसे वर्तमान रफ़्तार से बढती रही तो अगली आधी सदी में सारे विश्व का तापमान काफी अधिक बढ सकता है जो वायुमंडल को प्रभावित किए बिना नहीं रह सकता | इससे भयंकर प्राकर्तिक आपदयों का प्रकोप होता रहेगा समुद्र का जल स्तर बढ जायेगा तथा मौसम चक्र और वर्षा के स्वभाव में बहुत बदलाव आयगा |

ग्लोबल वार्मिंग के निम्नलिखित मुख्य संभावित प्रभाव है

  • जलवायु परिवर्तन (Climate Change) – मानव की विभिन्न गतिविधियों जैसे अद्दोगीकरण, शेहरी करण, बढ़ते परिवहन , परमाणु बिजलीघर आदि के कारण पृथ्वी के तापमान में हुई वृद्धि से जलवायु में हुए परिवर्तन को जलवायु परिवर्तन कहते है|
  • कृषि पर प्रभाव (Impact on Agriculture) – अगर तापमान की दर मोजुदा खतरनाक स्तर से ही जरी रही , तो फसलो की उत्पादन खत्म होने का खतरा पैदा हो जायगा | तापमान में बढ़ोतरी के कारण सिंचाई के लिए पानी की कमी के कारण ज्यादातर फसलों का उत्पादन घटेगा|
  • मानव स्वास्थ पर प्रभाव (Impact on Human Health) – वैज्ञानिक का मानना है की तापमान में बढ़ोतरी से रोगवाहक वायरस वेकटेरिया अपनी भोगोलिक सीमायों को लांघकर ने क्षत्रो में प्रवेश कर जायगा | तापमान में वृद्धि के साथ-साथ गर्मी-जनित रोगों में बढ़ोतरी और सर्दी-जनित रोगों में कमी होती | यक्र्तशोध, पोलियो, हेजा, पेचिश आदि रोग फेलेंगे|
  • बर्फ का पिघलना तथा जल संकट (Ice Melting and Water Crisis) – ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर की बर्फ लगातार पिघल रही है जिससे एक और बाद तो दूसरी और जल संकट का खतरा पैदा हो रहा है|

ग्लोबल वार्मिंग से बचाव – Protection from Global Warming in Hindi

वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी की चुनोती से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की पहल १९९२ रियो पृथ्वी सम्मलेन के पश्चात् कन्वेंशन चेंज (यून एफ सी सी सी) का गठन किया था | तथा ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के लिय जिम्मेदार खतरनाक ग्रीन हाउस गेसे के उत्सर्जन में कटोती की बाध्यता के लिए यून एफ सी सी सी द्वारा एक अंतराष्ट्रीय समझोता तैयार करने हेतु वार्ता शुरू की गई | 11 दिसंबर 1997 को जापान के क्यूटो शहर में यून एफ सी सी सी के तीसरे सम्मलेन में क्यूटो प्रोटोकाल को स्वीकार किया गया | इस प्रोटोकाल के तहत दुनिया के विकसित देशो को वर्ष 2008-२०१२ तक ग्रीन हाउस गेसे के उत्सर्जन को घटाकर १९९५ के स्तर से 5 प्रतिशत निचे लाने का प्रावधान किया है 16 फरवरी , २००५ को यह प्रोकल अस्तित्व में आया |

ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) की समस्या से बचने के लिए अंतराष्ट्रीय प्रयासों के साथ-साथ प्रादेशिक तथा व्यक्तिगत स्तर पर अनेक प्रयत्नों की जरुरत है जैसे जीवनशेली में परिवर्तन लाना, जनसख्या में वृद्धि पर नियंत्रण करना, तवर अद्दोगीकरण पर रोक, पेट्रोल , डीजल का प्रयोग , ससध्नो के अंधाधुंध दुरुपयोग पर रोक लगाना, कारखानों के जेहरिले पदार्थो का समुचित प्रबंध करना, अधिक से अधिक वृक्षरोपण करना आदि|

हमे उम्मीद है की आपको इस पोस्ट का अध्यन करके ग्लोबल वार्मिंग के बारे में  जैसे, ग्लोबल वार्मिंग क्या है ? ग्लोबल वार्मिंग होने के मुख्य कारण , ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम, ग्लोबल वार्मिंग से बचाव ?आदि प्रश्नों की पूरी व् सटीक सामान्य ज्ञान जानकारी अच्छी तरह से समझ आ गयी होगी, यदि फिर भी कुछ ऐसा जो यहाँ प्रकाशित नहीं किया या कुछ इसमें सुधार करना हो तो कृपया हमने आप ईमेल के जरिये बताये.