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दुनिया का सबसे ऊँचा कंक्रीट ब्रिज “पिंगटांग”

हमने यहाँ पर चीन के द्वारा बनाये गए दुनिया के सबसे ऊँचे ब्रिज “पिंगटांग” के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्रकाशित की है. हाल ही में चीन ने कंक्रीट ब्रिज पिंगटांग बनाये है. तो चलिए जानते है “पिंगटांग” के बारे में.

Full Information of World’s High Concrete Bridge “Pingtung”

भारत का पडोसी देश पूरी दुनिया में तरह-तरह के पुल बनाने के लिए जाना जाता है. चीन के कई तरीको के आश्चर्यजनक पुल बनाये है जैसे की शीशे के पुल और कंक्रीट पुल कहीं बहुत से पुल बनांये है. चीन में लगभग आधा दर्जन ऐसे पुल हैं जो अपने आप में ऐतिहासिक हैं. हाल ही में चीन ने दुनिया का सबसे सबसे ऊँचा ब्रिज बनाया है जिसे “पिंगटांग” (Pingtung) के नाम से पुरे विश्व में जाना जाता है. यह पुल हाल ही में 30 दिसंबर 2019 जनता के लिए खोल दिया गया है.

“पिंगटांग” कंक्रीट ब्रिज की संरचना (Structure of Pingtung Bridge)

चीन ने यह कंक्रीट टॉवर “पिंगटांग” ब्रिज गुइझोऊ में एक पुल है और काओदु नदी घाटी के ऊपर पिंगटांग लुओडियन एक्सप्रेसवे है. यह “पिंगटांग” ब्रिज दुनिया का सबसे सबसे ऊँचा ब्रिज है. इसकी ऊंचाई 332 मीटर है. इस ब्रिज में तीन प्रमुख टावर है. जो की केबल के सहारे से जुड़े हुए है. 2135 मीटर लम्बे “पिंगटांग” ब्रिज का ओडू नदी की घाटी पर बनाया गया है. इस ब्रिज चीन के लुओडियान एक्सप्रेस-वे को जोड़ता है. साथ ही यह ब्रिज 332 मीटर (1,089 फीट) की ऊंचाई के साथ वर्ल्ड का 2nd सबसे लम्बा पुल है. यह “पिंगटांग” ब्रिज 2100 मीटर (7000 फीट) की लंबाई के साथ एक मल्टी-स्पैन केबल-स्टे ब्रिज है. इस समय “पिंगटांग” ब्रिज से फ्रांस के मिलौ वियाडक्ट से 15 मीटर छोटा है. लेकिन इन दोनों की संरचना एक जैसी है. “पिंगटांग” ब्रिज के नीचे नदी के ऊपर 310 मीटर (1,020 फीट) का एक डेक है. “पिंगटांग” ब्रिज के निर्माण में चीन ने लगभग 1500 करोड़ रुपए खर्च किये है.

“पिंगटांग” कंक्रीट ब्रिज के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी (Important Information of Pingtung Bridge)

“पिंगटांग” ब्रिज चीन के पिंगटांग और लुओडियान नामक 2 काउंटी को जोड़ने के लिए बनाया गया है. इस ब्रिज के सहायता से पहाड़ी क्षेत्रों तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा. इस “पिंगटांग” ब्रिज की ऊंचाई लगभग 110 मंजिल की इमारत के बराबर है. चीन अपने देश के प्रांतों की गरीबी दूर करने के लिए पर्यटन सुविधाएं बढ़ा रहा है. इस ब्रिज को बनाने का काम 2016 में शुरु किया गया था.


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