What is Cold War in Hindi? – शीत युद्ध और इसके कारण, प्रभाव व् चरण हिंदी में

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शीतयुद्ध का दौर – What is Cold War in Hindi?

दित्तीय विश्वयुद्ध ने विश्व राजनीती में नई शक्तियां व् नए शासन को उत्पन्न किया | 1945 में मित्र शक्तियां संयुक्त राष्ट्र , सवियत संघ , ब्रिटेन व् फ्रांस ने जर्मनी, इटली व् जापान की शक्तियों को हराया था| उसके बाद प्रत्यक्षदर्शी दो मुख्य शक्तियां उठी – संयुक्त राज्य व् सोवियत संघ | धीरे धीरे वे दो शक्तियां दो गुटों में बदल गयीं | पश्चिमी क्षेत्र का नेतृत्व संयुक्त राष्ट्र व् पूर्वी क्षेत्र का नेतृत्व सोवियत संघ द्वारा किया गया | ये दो समूह विश्व राजनीती में पहली बार मानवीय इतिहास में वैचारिक रूप से एक हुए| इन दोनों प्रतिस्पर्धा के बीच युद्ध की गई गतिविधियाँ शीत युद्ध से जानी गयी|

शीत युद्ध बाकि हुए सभी युद्धों से भिन्न था , दुसरे शब्दों में सोवियत संघ व् संयुक्त राष्ट्र में किसी सेनिक मतभेद की जगह नहीं थी | यह एक वैचारिक युद्ध की स्थिति थी , जिसमे प्रतिद्न्धी शक्तियों , सेनिक समझोतों और नए तरीकों से शक्तियों को संतुलन करने का प्रयास किया गया था | पश्चिमी दल का नेतृत्व संयुक्त राष्ट्र व् उसके साथी ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा किया गया, जो उदारवादी लोकतंत्र का विचार रखते थे , सोवियत संघ का विचार साम्यवादी था | सत्ता व् श्रेष्टता के लिए जो वैचारिक युद्ध की स्थितियां थी, वह वैचारिक दलों के बीच थी| जो पश्चिमी दलों व् पूर्वी दल से जानी गयी| विश्व का द्विधुर्विय विभाजन सेनिक गठबंधन व् वारसा पेक्ट को स्पष्ट रूप से सामने लाया | शीत युद्ध एक राष्ट्र तनाव था, जिसने हर तरफ योजनाओं को ग्रहण किया हुआ था जो स्वयं में मजबूत व् कमजोर थी, परन्तु इन्होनें कभी असल युद्ध का एक अशांति में धकेल दिया था |

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इस प्रकार , विश्व युद्ध के पश्चात् राजनीती की व्याख्या शीत युद्ध ने की | फिर भी इस युद्ध का मुख्य कारण क्या था और कोन इसके लिए जिम्मेदार था यह एक वाद-विवाद का प्रश्न बन चुका है| शीत युद्ध के कारणों के बहुत से मत व् व्याख्याएं है|
पश्चिम्मी विद्द्वान , सोवियत संघ के विस्तारवाद की बात करते है प्रथम कारण संयुक्त राष्ट्र ने सोवियत संघ के अधिग्रहण यूरोप में साम्यवाद के बढ़ने को बलपूर्वक रोकना चाह, वाही दुसरे विद्वानों का कहना है अमेरिका विश्व में अपना साम्राज्य बढ़ाना चाहता था यद्दपि तीसरी विचारधारा ने कहा इस युद्ध के लिए दोनों ही जिम्मेदार थे | उदाहरन स्वरुप सोवियत संघ ने पूर्वी जर्मनी में चुनावों को रोकन व् इरान पर से अपनी सेना को हटाने से इनकार किया | उसी प्रकार वे कहते है की संयुक्त राष्ट्र कोई भी ऐसा मोका नहीं छोड़ता था जिससे सोवियत संघ को हानि पहुंचे |

शीतयुद्ध के कारण – Causes of the Cold War in Hindi

शीतयुद्ध के पैदा होने या उसके ठीक-ठीक कारण को लेकर विद्वानों में सर्वसम्मति नहीं है उनमें से कुछ के अनुसार 1917 की बोल्शेविक क्रांति उसका कारण थी | यद्दपि दूसरों के अनुसार , 1945 के सम्मलेन में विश्व को तीन शक्तियां संयुक्त राष्ट्र . सोवियत संघ व् ब्रिटेन ने विश्व राजनीती के भविष्य के बारे में विचार विमर्श करके शीतयुद्ध की शुरुआत की | दोनों शक्तियों के बीच संदेह इसी सम्मलेन में झलकने लगा | परन्तु कुछ विद्वानों का विश्वास था शीतयुद्ध का कारण द्वित्तीय विश्व युद्ध की समाप्ति है उनमे से कुछ के अनुसार यह इतिहास के नियम की विशेषता है की जब जितने वाली शक्तियां किसी कारण के लिए एक साथ होती है और उस करण के खत्म होते ही उनमें मतभेद हो जाते है|

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शीतयुद्ध का विकास – शीतयुद्ध चरण – Development of Cold War – Cold War Stage in Hindi

शीतयुद्ध में वृद्धि विभिन्न चरणों में हुई और जब तक यह समाप्त हुआ सोवियत संघ विघटित हो चुका था जोकि राजनीती का मुख्य खिलाडी था | शीतयुद्ध के निम्न चरण है|

  • प्रथम चरण (1947 – 50)
  • द्वितीय चरण (1950 – 53)
  • तीसरा चरण (1953 – 57)
  • चोथा चरण (1957 – 62)
  • पांचवा चरण (1962 – 69)
  • छठवाँ चरण (1969 – 78)
  • सातवां चरण (1979 – 1987)

शीतयुद्ध का अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव – Cold War influence (Effect) on international politics

शीतयुद्ध ने विश्व राजनीती को उतना ही प्रभावित किया जितना की दोनों विश्व युद्दों ने किया था | शीत युद्ध ने यूनाइटेड नेशन को बनाया , जिसमें सभी देश की सुरक्षा व् उन्हें आगे बढ़ने की और प्ररित करना व् उन पर छत्री की उनकी सुरक्षा करना| लेकिन शीतयुद्ध ग्लोब पर राजीनीति रूप में फेल गया था | इसने अंतराष्ट्रीय राजनीती पर कुछ मुख्य रूप से प्रभाव डाला | कुछ मुख्य प्रभाव जैसे:-

  1. इसने विश्व की द्विधुर्विय को समाप्त कर दिया|
  2. NAM की प्रासंगिकता पर प्रश्न |
  3. तीसरी दुनिया के देश ज्यादा असुरक्षित हो गए बड़ी शक्तियों के हाथ में शस्त्र आने से|
  4. सोवियत संघ का विघटन व् नए संयुक्त राष्ट्र का आता जो की अब नए पेक्स अमेरिका के नाम से जाना जाता है सत्ता व् प्रतिरोध को नए तरीके से बना चुका है |
  5. वर्ल्ड ट्रेड ओ. (WTO) का बनना जिसमे ब्यापार व् विकास की नई शर्ते थी शीतयुद्ध के पश्चात् वह विकासशील देशो का समर्थन करेगा|
  6. नाभिकीय हथियारों पर प्रतिबन्ध और विश्व के विभिन्न भागो में समाजवाद, धर्मनिरपेक्ष के साथ राज्य जो कभी कभी नया शीतयुद्ध लगता है , जो विश्व शांति के लिए शीतयुद्ध के पश्चात् , राजनीती में नया खतरा है|
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शीतयुद्ध की समाप्ति – End of the Cold War in Hindi

गोर्बाच्योव व् उनकी नीतियों का रूस में शुभागमन हुआ उसकी इच्छा थी की पश्चिमी देशो से वह शांति वार्ता करे| शीतयुद्ध के दिनों की अंतराष्ट्रीय राजनीती को शिखर वार्ता में बदलें | उसने परमाणु हथियारों व् रुनिवादी शक्तियों के लिए एक रास्ता बनाया| 1987 में गोर्बाच्योव INF संधि पर हस्ताक्षर करे जिसमें परमाणु मिसाइल के अलावा क्रूस व् पर्शिंग – 2 पर प्रतिबन्ध था | बाद में अमेरिका के राष्ट्रपति व् गोर्बाच्योव ने START संधि पर हस्ताक्षर किए जिसमे हथियारों को कम करना था लेकिन इस नए दितांत काल में संकटों की समाप्ति नहीं हुई, सोवियत संघ 1991 में विघटित हो गया और अंतराष्ट्रीय राजनीती का बड़ा अध्याय समाप्त हो गया, यही शीतयुद्ध था |

हमे उम्मीद है की आपको इस पोस्ट का अध्यन करके शीतयुद्ध के बारे में  जैसे, शीतयुद्ध क्या है? , शीतयुद्ध होने के मुख्य कारण , शीतयुद्ध के परिणाम, शीतयुद्ध के चरण, शीतयुद्ध का अंत आदि प्रश्नों की पूरी व् सटीक सामान्य ज्ञान जानकारी अच्छी तरह से समझ आ गयी होगी, यदि फिर भी कुछ ऐसा जो यहाँ प्रकाशित नहीं किया या कुछ इसमें सुधार करना हो तो कृपया हमने आप ईमेल के जरिये बताये.

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