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Economic Rights GK in Hindi – आर्थिक अधिकार हिंदी में

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अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रत्येक मनुष्य को धन चाहिए| धन कमाने, व्यय करने तथा उसका संग्रह करने के अधिकार मनुष्य के मौलिक अधिकार है| ये अधिकार व्यक्ति में सामाजिक सुरक्षा की भावना पैदा करते है. निचे इन अधिकारों का वर्णन किया गया हैं.

Economic Rights Samanaya Gyan in Hindi

(1) आजीविका का अधिकार – अपने जीवन – निर्वाह के लिए मनुष्य को धन चाहिए| धन परिश्रम करने से प्राप्त होता है| व्यापारी व्यापार करता है, कर्मचारी कार्यालय में काम करता है, मजदुर मिल में काम करता है और ये सब पारिश्रमिक के रूप में धन प्राप्त करते है| इस धन से वें अपने परिवार का पालन पोषण करते है| यदि मनुष्य परिषम करने के लिए तैयार है, उसे काम नहीं मिलता. तब वह धन कहाँ से लाएगा| काम न मिलने के लिए वह स्वयं दोषी नहीं है| अत: कई देशो में यह उत्तरदायित्व राज्य अपने ऊपर लेता है की प्रत्येक व्यक्ति को उसकी योग्यतानुसार कार्य मिले| यदि राज्य कार्य देने में असर्मथ रहता है तो वह उसे बेकारी-भत्ता देता है क्यूंकि बेकारी किसी भी देश का एक अभिशाप है| भारत सरकार ने यह जिम्मेदारी अभी तक अपने ऊपर नहीं ली है परन्तु इस दिशा में कुछ-न-कुछ करना प्रारंभ कर दिया है|

आजीविका मिलने की गारंटी के साथ-साथ राज्य श्रम का समय भी निश्चित करता है, जैसे मजदुर क्तिने घंटे काम करेगा. कार्यालय का कार्य-समय कितने घंटे रहेगा आदि|

(2) व्यवसाय की स्वतंत्रता का अधिकार – मनुष्य की प्रकृति भिन्न-भिन्न होती है| वह अपनी रूचि के अनुसार कार्य करना चाहता है| मनुष्य को अपनी रूचि के अनुसार कार्य मिलने पर वह शीघ्र कार्य में प्रवीणता प्राप्त कर लेता है| भारत में जाती प्रथा का निर्माण इसी प्रकार हुआ है| धीरे-धीरे जाती प्रथा में दोष आ गए और व्यवसाय जातियों पर आधारित हो गए| किन्तु अब व्यवसायों का चुनाव जन्म से नहीं, रूचि से किया जाने लगा है| किसी विशेष वर्ग के लिए कोई व्यवसाय निश्चित नहीं है| किसी भी जाती का व्यक्ति किसी भी व्यवसाय को अपना सकता है| किन्तु किसी व्यक्ति को समाज विरोधी व्यवसाय को अपनाने का धिकार नहीं दिया जा सकता| डाका डालना चोरी करना, अफीम या शराब बनाना एवं बेचना ऐसे ही कुछ निषिद्ध व्यवसाय हैं|

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(3) सम्पत्ति का अधिकार – सामान्यत: सभी प्रजातंत्रवादी देशो में संपत्ति का अधिकार नागरिकों को प्राप्त होता है| भारतीय संविधान में भी संपत्ति के अधिकार को एक क़ानूनी अधिकार के रूप में मान्यता प्राप्त है| वास्तव में सम्पत्ति के अधिकार के बारे में बहुत मतभेद है| समाजवादी विचारधारों के अनुसार निजी सम्पत्ति जैसा कोई अधिकार नहीं है| सब प्रकार की संपत्ति राज्य की है| राज्य के नियंत्रण में व्यक्ति सम्पत्ति का उपयोग करता है| दूसरी और उदारवादी विचारकों का मत है कार्य करने की रूचि तथा उत्साह उत्पन्न करने के लिए निजी सम्पत्ति का होना अत्यंत आवश्यक है| किसी भी व्यक्ति को कानून के आदेश के बिना उसकी सम्पत्ति से वंचित नहीं किया सकता| जिस वास्तु पर व्यक्ति अपना अधिकार समझता है, उसकी वृद्धि में वह प्रसन्नता अनुभव करता है|

(4) न्यूनतम आर्थिक स्तर का अधिकार – मनुष्य की कुछ अनिवार्य आवश्यकताएं होती है, जिनकी पूर्ति के बिना वह अपना जीवन निर्वाह नहीं कर सकता| भोजन, वस्त्र, रहने के लिए निवासस्थान आधी की आवश्यकताएं आवश्य ही पूरी होनी चाहिए| मनुष्य को जीवित रहने के अधिकार का तब ही कुछ महत्व है जबकि उसे न्यूनतम जीवन स्तर के अधिकारों की प्राप्ति होगी| हमारे देश में इस दृष्टि से बड़ी गंभीर स्थिति है| एक और बहुत-से-लोग है, जिन्हें दोनों समय भरपेट भोजन भी नहीं मिलता है और दूसरी और, वैभव सम्पन्न लोग विलासिता का जीवन व्यतीत करते है| अत: नागरिकों को न्यूनतम आर्थिक स्तर का अधिकार अवश्य मिलना चाहिए, जिससे कम से कम अनुवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके|

प्रिय मित्रो, हमे आशा है की, ऊपर दी गई आर्थिक अधिकारों (Economic Rights in Hindi) के बारे में सामान्य ज्ञान जानकरी में आपको सही और सटीक जानकारी प्राप्त हुई होगी| यदि कुछ ऐसा जो हमने यहाँ आर्थिक अधिकार के बारे में प्रकाशित नहीं किया तो कृपया हमने कमेंट के जरिए बताएं.

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