दशहरा या विजयादशमी त्यौहार

दशहरा या विजयादशमी भारत में हिन्दुओं का एक लोकप्रिय त्यौहार/पर्व है जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार अश्विन के महीने में मनाया जाता है। दशहरा नवरात्रि उत्सव के अंत दशमी को मनाया जाता है। दशहरा बुराई पर अच्छाई और सत्य की असत्य पर जीत का प्रतीक है और ये त्यौहार पूरे भारत में में मनाया जाता है। यह हिन्दुओं के सबसे महत्वपूर्ण त्योहार – दीपावली या दिवाली में से एक है, जिसे विजयदशमी के 20 दिन बाद मनाया जाता है।

About of Vijayadashami Dussehra in Hindi

दशहरा उत्सव दो सबसे महत्वपूर्ण हिंदू देवताओं – देवी दुर्गा और भगवान श्री राम की श्रद्धा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन कुछ संस्कृतियाँ देवी दुर्गा के विभिन्न अवतारों की वंदना करती हैं जैसे – सरस्वती, लक्ष्मी आदि, उनकी आस्था और विश्वास के अनुसार। कुछ धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि दशहरा शब्द संस्कृत के दो शब्दों – “दस” और “अरा” से जुड़कर प्राप्त हुआ है। पूर्व का अर्थ है 10 वां और बाद वाला दिन। इसलिए “दशहरा” का मतलब है 10 वें दिन या जीत के 10 वें दिन। “दशहरा” नाम की व्युत्पत्ति के बारे में एक और सिद्धांत यह है कि यह “दश” और “हर” को मिलाकर बनता है; पूर्व का अर्थ बुराई और बाद का अर्थ है नष्ट करना या हटाना। इस प्रकार, दशहरा का दिन बुराई को नष्ट करता है। “विजयादशमी” दो शब्दों – “विजया” और “दशमी” के मेल से बनी है। “विजया” का अर्थ है “जीत” और “दशमी” का अर्थ है “10 वीं (दसवीं)”.

प्राचीन हिंदू महाकाव्य रामायण में कहानी के अनुसार, भगवान् श्री राम की जीवन घटनाओं पर आधारित है। वह अपनी धार्मिकता, मनोबल और सिद्धांतों के लिए जाने जाते है। श्रीराम जी ने भाई भरत के लिए आसानी से अयोध्या के सिंहासन के लिए अपना उत्तराधिकार छोड़ दिया और पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के वनवास के दौरान दंडक वन में चले गए। श्रीराम के वनवास के दौरान रावन अपना भेष-भूषा बदलकर माता सीता का जबरन अपरण कर लिया था. इस प्रकार, रावण और भगवान राम के बीच एक ऐतिहासिक युद्ध के लिए घटनाओं की शुरुआत हुई।

प्रत्येक वर्ष गली मोहल्लो में बाल रामलीला की शुरुआत के साथ दशहरा उत्सव अधिक लोकप्रिय हो गया और एक बड़े सामुदायिक मेले का रूप ले लिया। आज भारत के लगभग हर राज्य में दशहरा के दौरान हर्षोल्लास के साथ उत्सव मनाया जाता है और सभी आयु वर्ग और विभिन्न समुदायों से जुड़े लोग इस उत्सव में हिस्सा लेते हैं। दशहरा पर रावण के पुतलों को जलाने का रिवाज काफी समय से चला आ रहा है इस दिन रावण के पुतलो को जलाना बुराई पर अच्छाई और सत्य की असत्य पर विजय का प्रतिक माना जाता है|

विजयदशमी या दशहरा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि हालांकि बुरी शक्तियां शक्तिशाली हो सकती हैं परन्तु यह सच्चाई और धार्मिकता के आगे कभी विजयी नहीं होती है। नए निवेश करने या नए व्यवसाय शुरू करने के लिए दशहरे का दिन बहुत शुभ माना जाता है। दक्षिण भारतीय संस्कृतियों में से कुछ, जो दशहरे पर देवी सरस्वती को पूजती हैं.

Leave a Comment