नाटो क्या है – उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन, कौन-कौन से देश इसके सदस्य हैं

नाटो के बारे में – उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन में अमेरिकी मिशन

नोट: नाटो संगठन से जुड़े किसी सदस्य देश पर यदि कोई अन्य देश हमला करता है तो इसकी रक्षा के लिए नाटों के सभी देश मिलकर उसका बचाव करेंगे तथा आवश्यकता पडने पर सभी मिलकर विरोधी देश पर हमला करेंगे.

क्या है नाटो? – What is North Atlantic Treaty Organization in Hindi?

What is NATO in Hindi: ‘नाटो’ यूरोप व उत्तरी अमरीकी देशों का एक राजनीतिक एवं सैन्य गठबंधन है। द्वितीय विश्व युद्ध (1939-45) के बाद अमरीका की अगुवाई में एक ऐसे संगठन की स्थापना हुई।

जो यूरोपीय देशों की सुरक्षा कर सके और जो देश इस संगठन के अंतर्गत रहे वह भी हर संकट की घड़ी में अपने सभी साथी देशों की सुरक्षा हेतु तत्पर रहें, क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद रूस यानी सोवियत संघ यूरोप से अपनी सेनाएं हटाने से इंकार कर रहा था। वहां साम्यवादी शासन प्रणाली की स्थापना का प्रयास कर रहा था। इसका फायदा उठाकर अमेरिका ने साम्यवाद विरोधी नारे लगाए और यूरोपीय देशों को साम्यवादी खतरे से सावधान किया। इसका परिणाम यह हुआ कि यूरोपीय देश एक ऐसे संगठन के निर्माण के लिए तैयार हो गए जो उनकी संकट की घड़ी में सुरक्षा करे। क्योंकि अमेरिका चाहता था कि विश्व के सभी देशों पर सभी महाद्वीपों पर उसकी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से दखलअंदाजी व शासन रहे और इसी मंसूवे में वह कामयाब हो गया।

नाटो की स्थापना (NATO founded in Hindi)

उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की स्थापना 4 अप्रैल 1949 को हुई थी, उस समय समय नाटो के सदस्य देशों की संख्या 12 थी। उसका मुख्यालयब्रुसेल्स (बेल्जियम) में स्थित है। यह संगठन एक सामूहिक व्यवस्था है जिसके अंतर्गत सदस्य देश बाहरी आक्रमण की स्थिति में एक दूसरे की सहायता व सुरक्षा के लिए सहमत होंगे। इस संगठन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सदस्य देशों की स्वतंत्रता व स्वायत्तता की रक्षा करना है।

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नाटो के सदस्य देश – NATO members, countries list in Hindi

अप्रैल 2024 में स्वीडन के शामिल होने के बाद, नाटो के सदस्य देशों की संख्या 32 हो गई है, इससे पूर्व फिनलैण्ड इसका 31वाँ सदस्य अप्रैल 2023 में बना और नॉर्थ मेसीडोनिया 2020 में इसका 30वाँ सदस्य बना था.

नाटो के 32 सदस्यों बनने का तिथिवार विवरण निम्नलिखित हैं-

4 अप्रैल, 1949 को स्थापना के समय नाटो के 12 सदस्य बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैण्ड, इटली, लक्जेमबर्ग, नीदरलैण्ड्स, नॉर्वे, पुर्तगाल, ब्रिटेन व अमरीका.

18 फरवरी, 1952 को शामिल हुए 2 राष्ट्र-ग्रीस, टर्की.

9 मई, 1955 को शामिल हुआ-जर्मनी.

30 मई, 1982 को शामिल हुआ-स्पेन.

12 मार्च, 1999 को शामिल हुए 3 सदस्य राष्ट्र-चैक गणराज्य, हंगरी व पोलैण्ड

29 मार्च, 2004 को शामिल हुए 7 सदस्य राष्ट्र बुल्गारिया, एस्टोनिया, लाटविया, लिथुवानिया, रूमानिया, स्लोवाकिया व स्लोवेनिया.

1 अप्रैल, 2009 को शामिल हुए 2 सदस्य राष्ट्र अल्बानिया व क्रोएशिया.

25 जून, 2017 को शामिल हुआ-बाल्कन राज्य मोंटेनेग्रो (Montenegro).

27 मार्च, 2020 को नॉर्थ मेसीडोनिया नाटो का 30वाँ सदस्य बना.

4 अप्रैल, 2023 को फिनलैण्ड नाटो का 31वाँ सदस्य बना.

7 मार्च 2024 को यूरोपीय देश स्वीडन NATO में शामिल हो गया जिसके बाद उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य देशों की संख्या 32 हो गई है.

नाटो के उद्देश्य – NATO’s objectives in Hindi

नाटो के अंतर्गत लगभग 32 देश / राज्य सम्मिलित हैं। नाटो का मुख्य उद्देश्य किसी भी समय यूरोप पर आक्रमण की स्थिति में अबरोधक या सुरक्षा कवच की भूमिका निर्वाह करना है।

सोवियत संघ के द्वारा पश्चिम यूरोप में अनाधिकृत विस्तार को रोकना तथा युद्ध की स्थिति में जन सामान्य को मानसिक रूप से तैयार करना।

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सैन्य तथा आर्थिक विकास के लिए अपनी कार्यप्रणाली अथवा कार्यक्रमों के द्वारा यूरोपीय राष्ट्रों को सुरक्षा प्रदान करना।
यूरोप के देशों को एक सूत्र में संगठित करना तथा जो देश इस संगठन में सदस्य हैं, उनमें आपसी तालमेल बिठाना।

सामाजिक आर्थिक रूप से उनको मजबूत बनाना, युद्ध की स्थिति में सभी को एकजुट करके दुश्मन के ऊपर गहरा आघात करना, साथ ही नाटो का मुख्य उद्देश्य विश्वसनीयता निवारण तथा वास्तविक तनाव शैथिल्य जैसे सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए एक सामूहिक रक्षा व्यवस्था, परस्पर संवाद, पारस्परिक सहयोग तथा सैन्य दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण न्याय प्रमाणिक निशस्त्रीकरण समझौते के माध्यम से सकारात्मक संबंधों की दिशा मे कार्य करना तथा अपने सैन्य गठबंधन के भीतर आर्थिक, वैज्ञानिकव सांस्कृतिक सहयोग व सामंजस्य स्थापित करना।

चीन और भारत नाटो के सदस्य नहीं है परंतु चीन नाटो से डरता है क्योंकि उसे लगता है कभी अमेरिका या भारत से उसकी बिगड़ी तो नाटो देश चुप नहीं बैठेंगे। दूसरी बात वर्तमान 2021 में यूक्रेन और रशिया के मध्य चल रहे युद्ध से यह साफ जाहिर है कि यूक्रेन नाटो का सदस्य ना होने के बावजूद भी यूरोपीय देशों ने रूस के खिलाफ यूक्रेन का साथ दिया। ऐसी स्थिति में नाटो भी अपने सभी साथी सदस्य देशों की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहता है।

नाटो की उत्पत्ति, इतिहास – Origins of NATO in Hindi

नाटो एक सैन्य संगठन है। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य यूरोपीय देशों को बाहरी आक्रमणों से एक सुरक्षा कवच प्रदान करना है। द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात यूरोप की सुरक्षा एक चिंतनीय विषय थी। विशेषकर उस स्थिति में जब सोवियत संघ पूरे यूरोप में अपना विस्तार कर रहा था।

मार्च 1948 में बेल्जियम, फ्रांस, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड तथा यूनाइटेड स्टेट के विदेश मंत्रियों ने रूस में  सामूहिक रुप से आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सामूहिक आत्मरक्षा से परिपूर्ण संधि पर हस्ताक्षर किए। साथ ही यह चिंतन भी किया कि अमेरिका के बिना वह रो सेल्स संधि के सदस्य सोवियत संघ यानी रूस की शक्ति का अकेले सामना नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने अमेरिका को भी अपने साथ में लाने का निश्चय किया।

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इसके उपरांत अप्रैल 1948 में वाशिंगटन डीसी में हुई बैठक में बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आईसलैंड, इटली, लक्जमबर्ग निकाल अमेरिका के अपने संघ की स्थापना के लिए उत्तर अटलांटिक संधि परहस्ताक्षर किए। इसके उपरांत 1949 में नाटो की स्थापना हुई। इसके उपरांत यूनान की 1952 में,जर्मनी 1955 में,स्पेन 1982 में, 1999 में चेक गणराज्य हंगरी और पोलैंड नाटो के सदस्य बने इसके उपरांत बुलगारिया, लाटबिया, एस्तोनिया,लिथुआनिया 2004 में,अल्बानिया,क्रोएशिया 2009 में नाटो के सदस्य हुए नाटो का सबसे आखिरी सदस्य मेसीडोनिया है।

नाटो के प्रमुख कार्य -Main tasks of NATO in Hindi

नाटो का मुख्य कार्य अपने सदस्य देशों को एक सुरक्षा क्षेत्र प्रदान करना है। उनके आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक उत्थान हेतु सदैव प्रयास करना। उनकी समस्त गतिविधियों पर नजर रखना, क्योंकि इसकी स्थापना ही इसीलिये हुई है कि जब भी युद्ध की स्थिति बने तो सभी साथ मिलकर उसका सामना करें। द्वितीय विश्व युद्ध में देखा गया कि सभी देश आपस में लड़ रहे थे। जिसका परिणाम यह हुआ कि कुछ देश तवाह हुए, हजारों लाखों की तादाद में लोगों की मृत्यु हुई। इसी संकट को भांपते हुए इस संगठन की स्थापना की गई है। जिसके अंतर्गत सभी 30 देश परिवार की तरह रहते हुये युद्ध की स्थिति में एक दूसरे का सहयोग करते हैं तथा आर्थिक व राजनीतिक रूप से भी एक दूसरे की मदद के लिए तैयार है।

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