भारत हरित क्रांति इतिहास, उद्देश्य, प्रभाव हिंदी मे

हरित क्रांति परिचय (Introduction of Green Revolution in Hindi)

नॉर्मन अर्नेस्ट बोरलॉग” (1914 – 2009) एक अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक और मानवतावादी थे। कुछ लोग उन्हें “आधुनिक कृषि का जनक” और हरित क्रांति का जनक मानते हैं। उन्होंने अपने जीवन के काम के लिए 1970 का नोबेल शांति पुरस्कार जीता।

भारत में हरित क्रांति (Green Revolution in India in Hindi)

भारत एक कृषि प्रधान देश है भारत की अर्थव्यवस्था प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर ही निर्भर है। भारत की 70% आबादी ग्रामीण है और अपनी गुजर-बसर करने के लिए कृषि को ही मुख्य आधार मानती है, प्राचीन काल से ही भारत में कृषि परंपरागत तरीकों से की जाती रही है। ऐसी परिस्थिति में पुरानी कृषि पद्धतियों, पुराने बीज तथा सिंचाई के साधनों जैसे तालाब, कुआं आदि की निर्भरता एवं बैल की जोताई के कारण किसानों को कम मुनाफा अथवा कम उत्पादन प्राप्त होता रहा। जिससे किसान घाटे की ओर जाता रहा, हरित क्रांति ने कृषि को और किसान को एक नया जीवन प्रदान किया है। हरित क्रांति किसानों के बीच किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। उन्होंने अपने जीवन के काम के लिए 1970 का नोबेल शांति पुरस्कार जीता। भारत में हरित क्रांन्ति की शुरुआत सन 1966-67 से हुई। भारत में हरित क्रांति का जनक वनस्पति वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन को माना जाता है। जिनके प्रयासों से भारत में गेहूं और चावल की जातियों में सुधार और उत्पादन में वृद्धि हुई।

हरित क्रांन्ति से अभिप्राय देश के सिंचित एवं असिंचित कृषि क्षेत्रों में अधिक उपज देने वाले संकर तथा बौने बीजों के उपयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि करना हैं।

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भारत में हरित क्रांति के उद्देश्य (Objectives of Green Revolution in India in Hindi)

  • भारत में भुखमरी की समस्या का निदान करना।
  • भारत का कृषि उत्पादन बढ़ाना कृषि को नए आयाम प्रदान करते हुए नवीन कृषि पद्धतियों जैविक खेती एवं उन्नत कृषि की ओर बढ़ना।
  • किसान की आय बढ़ाना एवं उत्पादन का सही मूल्य दिलाना।
  • बंजर भूमियों को पोषक तत्वों से युक्त करके कृषि कार्य हेतु तैयार करना।
  • हरित क्रांति के उद्देश्यों में ग्रामीण विकास, औद्योगिक विकास पर आधारित संपूर्ण कृषि का आधुनिकीकरण करना।
  • हरित क्रांति के उद्देश्यों में  अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे का विकास, कच्चे माल की आपूर्ति आदि शामिल थे।

हरित क्रांति के सकारात्मक प्रभाव (Positive Impact of Green Revolution in Hindi)

भारत में यदि हरित क्रांति के सकारात्मक प्रभाव की ओर नजर डालें तो इसका भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था एवं मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है।

जहां एक ओर प्राचीन कृषि पद्धतियों पुरानी किस्मों एवं पुराने बीजों के प्रयोग से उत्पादन अत्यधिक कम एवं मुनाफा कम होता था। वही हरित क्रांति के प्रादुर्भाव से कृषि में सुधार हुआ है। जिसके चलते आज किसान के पास अनाज के भंडार है। रेशम उत्पादान, खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है। उपस्थित भंडार से प्राकृतिक आपदाओं का भी कई बार सुरक्षित रूप से सामना किया जा चुका है तथा उत्पादन का विदेशों की ओर निर्यात करके भी विदेशी मुद्रा की प्राप्ति से अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान मिली है। आज किसान खुशहाल है तथा कृषि भी विकास की ओर जा रही है। इससे देश भी विकसित देशों की श्रेणी में अपने – अपने कदम बढ़ा रहा है।

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हरित क्रांति के नकारात्मक प्रभाव (Negative Impact of Green Revolution in Hindi)

हरित क्रांति के नकारात्मक प्रभाव के चलते मृदा को काफी नुकसान हुआ है। अत्यधिक उत्पादन की चाह में किसान रासायनिक खादों, कीटनाशकों, खरपतवार नाशकों का प्रयोग बड़ी मात्रा में करते हैं। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति को काफी नुकसान पहुंचता है। उसकी भीतर मौजूद पोषक तत्वों का ह्रास होता है। जिससे मृदा के बंजर होने का खतरा भी बना रहता है। ऐसी परिस्थिति में आवश्यक है कि रासायनिक खादों का तथा कीटनाशकों का कम से कम प्रयोग हो अथवा जैविक खाद एवं जैविक खेती को अपनाया जाए साथी भूमि प्रदूषण, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण का भी खतरा बना रहता है। जिससे प्रकृति को और वातावरण को भी अत्यधिक नुकसान होता है।

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