भाषा, बोली, लिपि और व्याकरण की परिभाषा हिंदी में

भाषा , बोली, लिपि और व्याकरण

भाषा (Language) – हमारे मन में अनेक भाव और विचार उठते रहते है| उन्हें प्रकट करने के लिए हमें किसी माध्यम की आवश्यकता होती है | जब हम अपने भावों और विचारों को बोलकर या लिखकर प्रकट करते है तो उस माध्यम को ही भाषा कहते है या फिर जिस साधन का प्रयोग करके हम अपने विचार और भाव दूसरों तक पहुंचाते है तथा दूसरों के विचारों और भावों को समझते है, उसे भाषा कहते है|

भाषा के भेद:

हम जानते है की भाषा का प्रयोग मुख्य रूप से बोलने या लिखने के लिए किया जाता है | इसी आधार पर भाषा के दो भेद होते है –

  1. मौखिक भाषा (Oral Language)
  2. लिखित भाषा (Written Language)

मौखिक भाषा (Oral Language) जब हम अपने विचार लिखकर प्रकट करते हा तो भाषा के इस रूप को लिखित भाषा कहते है | भाषा का यह रूप बहुत महत्वपूर्ण है |

लिखित भाषा (Written Language) विचारों और ज्ञान को सुरक्षित रखने के लिए लिखित भाषा का ही प्रयोग किया जाता है | सभी पुस्तकें , पत्रिकाएँ , अखबार, पात्र आदि लिखित भाषा में होते है |

कभी-कभी हम अपने विचार संकेतों के द्वारा भी प्रकट करते है | इस माध्यम को सांकेतिक भाषा कहा जाता है | लेकिन भाषा का यह रूप महत्वपूर्ण नहीं है | इसके द्वारा विचार या भाषा को स्पष्ट रूप में प्रकट नहीं किआ जा सकता|

संसार में अनेक भाषाएँ बोली जाती है, जैसे – अंग्रेजी, फ्रेंच, चीनी, स्पेनिश, इटेलियन, अरबी आदि | हमारे देश में भी अनेक भाषाएँ प्रचलित है | हमारे देश के संविधान द्वारा लगभग अठारह भाशावों को मान्यता दी गई है | संविधान द्वारा मान्यताप्राप्त भारतीय भाषा है – असमिया, बंगला, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, मराठी, मलयालम, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिन्धी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, कोंकड़ी, मणिपुरी और नेपाली|

हिंदी हमारी राजभाषा है | देश के स्वतंत्र होने से पहले अंग्रेजी यहाँ की राजभाषा थी | हिंदी हमारे देश की सबसे महत्वपूर्ण भाषा है | यह संपूर्ण देश की संपर्क भाषा बन चुकी है | इसे सरे देश में बोला और समझा जाता है|

बोली (Dialect)भाषा का क्षेत्रीय रूप | उदाहरन के लिए हम हिंदी भाषा को ले सकते है | अलग-अलग क्षेत्रो में इसके अलग-अलग रूप देखने को मिल जाते है; जैसे – ब्रजभाषा, बुन्देली, छत्तीसगनी, अवधि, भोजपुरी, हरियाणवी आदि| बोली का मह्त्र्व क्षेत्र विशेष के लिए ही होता है|

लिपि (Script) भाष को लिखने के लिए कुछ ध्वनि-चिन्हों का प्रयोग होता है | अलग-अलग भाषाओँ के लिए अलग-अलग तरह के ध्वनि-चिन्हों का प्रयोग होता है| (मुख से निकलने वाली ध्वनियों को लिखकर प्रकट करने के लिए जिन चिन्हों का प्रयोग होता है उन चिह्नों के सामूहिक रूप को लिपि कहते है).

संसार के अलग-अलग भाषें अलग-अलग- लिपियों में लिखी जाती लेकिन यह आवश्यक नहीं है की संसार की हर भाषा की अलग लिपि हो| संसार की कई भाषाएँ रोमन लिपि में लिखी जाती है, जैसे-अंग्रेजी, फ्रेंच आदि| हिंदी, संस्कृत और मराठी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है|

व्याकरण (Grammar) – भाषा को ठीक-ठीक बोलने और लिखने के लिए कुछ नियमों को जानना आवश्यक है | उन नियमों के समूह को व्याकरण कहते है|

जो शास्त्र हमें भाषा को ठीक-ठीक बोलना और लिखना सिखाता है, उसे व्याकरण कहते है|

किसी भाषा के व्याकरण का अच्छा ज्ञान होने पर ही व्यक्ति उस भाषा का शुद्ध प्रयोग कर सकता है| संसार की प्रत्येक भाषा का अपना व्याकरण होता है|

व्याकरण के विभाग

व्याकरण के मुख्य विभाग तीन है-

  1. वर्ण-विचार (Phonology)
  2. शब्द-विचार (Morphology)
  3. वाक्य-विचार (Syntax)

वर्ण-विचार (Phonology) – शब्द की रचना वर्णों से होती है | वर्ण-विचार में वर्णों के आकर, उच्चारण और इनके मेल से शब्द बन्ने का अध्ययन किया जाता है|

शब्द-विचार (Morphology) – प्रत्येक भाषा का अपना शब्द-भण्डार होता है| यह शब्द-भण्डार कई तत्वों से बनता है| भाषा अपनी आवश्यकता के अनुसार नए-नए शब्दों का निर्मन करती रहती है और अन्य भाषाओं तथा बोलियों से भी शब्-ग्रहण रहती है| इस विभाग से शब्दों की उत्पत्ति, निर्माण, आगमन और अर्थ का अध्ययन किया जाता है|

वाक्य-विचार (Syntax) – वाक्य भाषा की सबसे छोटी इकाई है| भाषा में वाक्य की एक निश्चित बनावट होती है | इस विभाग में वाक्य के गठन, वाक्य-भेद और शब्दों के आपसी संबंध का अद्ध्या किया जाता है|

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